श्रीनगर: गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर अमरनाथ यात्रा 2026 का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव पूरा हुआ। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र छड़ी मुबारक को श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े से पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन के लिए पहलगाम ले जाया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु शामिल हुए। छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने बताया कि यात्रा पूरी श्रद्धा और परंपराओं के अनुसार जारी है तथा अब तक लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।
4.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन
महंत दीपेंद्र गिरी के अनुसार, इस वर्ष अब तक करीब 4.25 लाख श्रद्धालु पवित्र अमरनाथ गुफा में दर्शन कर सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन औसतन 17,000 से 18,000 श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो रहे हैं। मौसम की चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है, जो यात्रा की सफलता का बड़ा संकेत है।
सावन शुरू होने से बढ़ सकती है श्रद्धालुओं की संख्या
महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा कि सावन माह की शुरुआत के साथ अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, इसलिए आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
'प्रकृति की पूजा भी हमारी परंपरा का हिस्सा'
महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा केवल ईश्वर की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रत्येक स्वरूप का सम्मान और पूजन भी उसका अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समुद्र, नदियां, झरने, पशु-पक्षी और समस्त जीवन के प्रति श्रद्धा रखना भारतीय संस्कृति की पहचान है। मुख्य यात्रा के दौरान पूरे देश, जम्मू-कश्मीर और सभी लोगों की शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी।
पंपोर में माता ज्वाला जी का वार्षिक उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया
इस बीच जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का वार्षिक उत्सव भी धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना आयोजन
पंपोर में आयोजित इस धार्मिक उत्सव की खास बात यह रही कि इसमें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर भागीदारी की। स्थानीय लोगों ने इसे कश्मीर की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी कश्मीर की पहचान है।
छड़ी मुबारक का धार्मिक महत्व
अमरनाथ यात्रा में छड़ी मुबारक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, यह पवित्र छड़ी निर्धारित तिथियों पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अंततः अमरनाथ गुफा तक पहुंचती है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की कृपा और यात्रा की आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक मानते हैं।
Highlights
- गुरु पूर्णिमा पर श्रीनगर से पहलगाम पहुंची पवित्र छड़ी मुबारक।
- भूमि पूजन और नवग्रह पूजा की पारंपरिक रस्में संपन्न।
- अमरनाथ यात्रा में अब तक 4.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन।
- प्रतिदिन 17 से 18 हजार श्रद्धालु यात्रा में हो रहे शामिल।
- सावन शुरू होने के साथ यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद।
- पंपोर में माता ज्वाला जी उत्सव में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता।