सीहोर: गुरु पूर्णिमा 2026 के पावन अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु तत्व, सनातन संस्कृति और शिव भक्ति का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु बनाने में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यदि जीवन में कोई योग्य सद्गुरु न मिले तो भगवान शिव को ही अपना गुरु मानकर उनकी आराधना करें। उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति के जीवन को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाता है। सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। गुरु पूर्णिमा के दिन ही करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण, गुरु दर्शन और गुरु दीक्षा महोत्सव में भाग लिया।
'गुरु चुनने में जल्दबाजी न करें, 50 बार सोचकर लें निर्णय'
पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में गुरु बनाना एक गंभीर निर्णय है। उन्होंने सलाह दी कि किसी को भी अपना गुरु बनाने से पहले अच्छी तरह विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कोई योग्य सद्गुरु न मिले तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। प्रतिदिन भगवान शिव को जल अर्पित करें और महादेव को ही अपना गुरु मानकर भक्ति करें। उनके अनुसार भगवान शिव स्वयं जगतगुरु हैं और भक्तों का कल्याण करने वाले हैं।
जीवन की चार अवस्थाएं और चार मार्गदर्शक
अपने प्रवचन में पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन के चार महत्वपूर्ण चरणों और उनमें मार्गदर्शन करने वाले चार व्यक्तित्वों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि—
- बचपन में मां जीवन को संस्कार देती है।
- युवावस्था में पिता सही दिशा और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाते हैं।
- अधेड़ावस्था में शिक्षक ज्ञान और विवेक का विस्तार करते हैं।
- बुढ़ापे में सद्गुरु व्यक्ति को अध्यात्म और परमात्मा से जोड़ते हैं।
- उन्होंने कहा कि इन चारों का सम्मान करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।
गुरु पूर्णिमा पर शिव भक्ति का दिया संदेश
पंडित प्रदीप मिश्रा ने सभी देशवासियों और शिव भक्तों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस दिन अपने गुरु के चरणों में प्रणाम अवश्य करें। यदि किसी कारणवश गुरु के पास जाना संभव न हो तो भगवान शिव का अभिषेक करें, उन्हें जल अर्पित करें और अपने गुरु का स्मरण करते हुए भक्ति में लीन रहें। उन्होंने कहा कि गुरु का सम्मान और उनके बताए मार्ग पर चलना ही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक महत्व है।
'वाणी में मिठास लाएं, यही सबसे बड़ा संस्कार'
अपने संदेश में उन्होंने वाणी की पवित्रता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान उसके व्यवहार और शब्दों से होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि—
- हमेशा मधुर और सकारात्मक वचन बोलें।
- कटुता और अहंकार का त्याग करें।
- सनातन संस्कृति के संस्कारों को अपनाएं।
- समाज में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाएं।
उनके अनुसार मीठी वाणी ही सबसे बड़ा संस्कार है और यही समाज को जोड़ने का माध्यम बनती है।
कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
आयोजकों के अनुसार—
- गुरु पूर्णिमा के दिन 1.5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
- छह दिवसीय महोत्सव में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का दावा किया गया है।
- श्रद्धालुओं के लिए पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई।
- देशभर से आए 5,000 से अधिक सेवादार भोजन वितरण, मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।
- प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी वितरित की जा रही है।
- प्रशासन और आयोजन समिति ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
गुरु तत्व को जीवन में अपनाने का आह्वान
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली शक्ति हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु के उपदेशों को जीवन में उतारने, भक्ति का मार्ग अपनाने और सनातन संस्कृति के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने की अपील की।
Highlights
- गुरु पूर्णिमा पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु तत्व का महत्व बताया।
- कहा- योग्य गुरु न मिले तो भगवान शिव को ही अपना गुरु मानें।
- गुरु चुनने में जल्दबाजी न करने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह।
- जीवन की चार अवस्थाओं और चार मार्गदर्शकों का किया उल्लेख।
- कुबेरेश्वर धाम में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
- छह दिवसीय महोत्सव में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का दावा।