BRICS शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में शनिवार को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के सामने घोषणा पत्र का मसौदा रखा और पूछा कि क्या किसी देश को इस पर कोई आपत्ति है। किसी भी सदस्य देश की ओर से आपत्ति नहीं जताई गई। इसके बाद घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसमें BRICS की भविष्य की प्राथमिकताओं के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों का साझा रुख सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि घोषणापत्र में शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं का सार और BRICS सहयोग को आगे बढ़ाने की प्राथमिकताएं शामिल हैं।
बदलती दुनिया में वैश्विक संस्थानों को बदलने की जरूरत पर PM मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की जरूरत को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया की बदलती जरूरतों के अनुरूप इन संस्थानों में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया को बेहतर किया जाना चाहिए। नई दिल्ली घोषणापत्र में भी बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही अलग-अलग देशों के दृष्टिकोण और उनके राष्ट्रीय हितों का सम्मान करने पर जोर दिया गया है।
युद्ध और टकराव पर BRICS का संदेश- विवाद की जड़ तक पहुंचना जरूरी
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों के बीच BRICS देशों ने युद्ध और टकराव को रोकने के प्रयास तेज करने की जरूरत बताई। घोषणापत्र में कहा गया कि विवादों को खत्म करने के लिए केवल तत्काल परिस्थितियों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। संघर्ष के मूल कारणों को समझकर उन्हें दूर करने की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए बातचीत, आपसी सलाह और कूटनीति के रास्ते को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अलग-अलग देशों के हितों और नजरिए का सम्मान करने पर सहमति
नई दिल्ली घोषणापत्र में वैश्विक मुद्दों पर बहुपक्षीय तरीके से आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया कि इस प्रक्रिया में देशों के अलग-अलग नजरिए और राष्ट्रीय हितों का सम्मान किया जाना चाहिए। यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब BRICS के सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक कदमों पर BRICS ने जताई चिंता
घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। BRICS देशों का कहना है कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं। सदस्य देशों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में नियमों के पालन और सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
परमाणु टकराव के खतरे पर भी चिंता, जोखिम कम करने की अपील
नई दिल्ली घोषणापत्र में परमाणु हथियारों से जुड़े खतरों और परमाणु टकराव की बढ़ती आशंका पर भी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने ऐसे जोखिमों को कम करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने के प्रयासों की जरूरत बताई।
BRICS देशों के बीच सीमा पार भुगतान को आसान बनाने पर बातचीत जारी रहेगी
घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। इसके लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया गया है, ताकि BRICS देशों के बीच सीमा पार भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशे जा सकें।
अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा दबाव वाले कदमों की निंदा
BRICS देशों ने ऐसे एकतरफा आर्थिक और अन्य दबाव वाले उपायों की भी निंदा की, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं माना जाता। घोषणापत्र में ऐसे कदमों के बजाय बहुपक्षीय सहयोग, संवाद और बातचीत के जरिए विवादों का समाधान तलाशने पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली घोषणापत्र से क्या संदेश गया?
BRICS के इस घोषणापत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, व्यापार में नियमों के पालन, युद्ध और संघर्षों के कूटनीतिक समाधान, परमाणु जोखिम कम करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली है। समापन सत्र में घोषणा पत्र का बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से स्वीकार किया जाना भी सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।