मध्यप्रदेश में बारिश के मौसम के दौरान सर्पदंश की घटनाओं की आशंका को देखते हुए शासन ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सर्पदंश को स्थानीय आपदा घोषित करते हुए सभी जिलों को आवश्यक तैयारी और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्राधिकरण के अनुसार बारिश के दौरान सांपों के प्राकृतिक आवास और बिलों में पानी भर जाता है। ऐसे में सांप सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में मानव बस्तियों, घरों और खेतों के आसपास पहुंच सकते हैं।
अस्पतालों में एंटी-वेनम रखना अनिवार्य
निर्देशों के तहत सभी शासकीय अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके साथ ही जीवनरक्षक दवाइयां और आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।इस व्यवस्था का उद्देश्य सर्पदंश के मामलों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
हर जिले में तैयार होगा सर्पदंश का डाटाबेस
सर्पदंश की घटनाओं की निगरानी के लिए जिला स्तरीय डाटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं अधिक सामने आ रही हैं।प्रभावित क्षेत्रों की पहचान के आधार पर भविष्य में जागरूकता और रोकथाम से जुड़े कदम उठाए जा सकेंगे।
सर्प-मित्रों का नेटवर्क बनाने के निर्देश
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने स्थानीय स्तर पर सर्प-मित्रों का नेटवर्क तैयार करने के लिए भी कहा है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर सांपों से संबंधित घटनाओं में स्थानीय स्तर पर मदद और जागरूकता उपलब्ध कराना है।
जागरूकता अभियान चलाने पर जोर
सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और कृषि चौपालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।बारिश के मौसम में सांपों के घरों और खेतों के आसपास आने की आशंका को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जानकारी दी जाएगी।
जिलों को 23.17 लाख रुपये की राशि
प्रशिक्षण एवं क्षमता वृद्धि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रत्येक जिले को 23.17 लाख रुपये दिए गए हैं। इस राशि का उपयोग संबंधित तैयारियों और क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यों के लिए किया जाना है।