इंदौर, 12 सितंबर 2026 | इंदौर नगर निगम की सियासत में पार्षद जीतू यादव की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) में वापसी के बाद पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। भाजपा पार्षद कमलेश कालरा शनिवार को अपने परिवार के साथ राजवाड़ा पहुंचे और देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा के सामने विरोध-धरने पर बैठ गए। कालरा परिवार हाथों में पोस्टर लेकर फैसले का विरोध करता दिखाई दिया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को आदेश जारी कर जितेंद्र उर्फ जीतू यादव को दोबारा MIC सदस्य बनाया है। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी फैसले के बाद भाजपा के भीतर पुराना विवाद फिर सतह पर आ गया है।
अहिल्या प्रतिमा के सामने धरने पर बैठा कालरा परिवार
कमलेश कालरा अपने परिवार के साथ ऐतिहासिक राजवाड़ा पहुंचे। यहां देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा के सामने धरना देते हुए उन्होंने पार्टी के फैसले पर नाराजगी जताई। कालरा का कहना है कि जीतू यादव की भाजपा में वापसी के समय उन्होंने संगठन के निर्णय को स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब उन्हें दोबारा MIC में शामिल कर महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने के बाद वह न्याय के लिए अपनी लड़ाई आगे बढ़ाएंगे।
शुक्रवार को MIC में हुई जीतू यादव की वापसी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 11 सितंबर को जारी आदेश में जीतू यादव को MIC में शामिल किया। उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार दिया गया है। इस विभाग का प्रभार अब तक MIC सदस्य निरंजन सिंह ‘गुड्डू’ चौहान के पास था। यानी अगस्त में पार्टी में वापसी के बाद अब जीतू यादव की नगर निगम की सत्ता संरचना में भी औपचारिक वापसी हो गई है।
अगस्त में खत्म हुआ था 6 साल का निष्कासन
जीतू यादव को जनवरी 2025 के विवाद के बाद भाजपा ने छह साल के लिए निष्कासित किया था और उन्हें MIC से भी बाहर होना पड़ा था। बाद में पुलिस जांच में घटना में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका का सबूत नहीं मिलने के बाद भाजपा ने 18 अगस्त 2026 को उनका निष्कासन समाप्त कर प्राथमिक सदस्यता बहाल कर दी थी। पार्टी में वापसी के समय भी कमलेश कालरा ने आपत्ति जताई थी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखकर फैसले पर सवाल उठाए थे।
क्या था कमलेश कालरा-जीतू यादव विवाद?
मामला जनवरी 2025 का है। भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के घर पर एक समूह ने हमला और तोड़फोड़ की थी। कालरा के परिवार ने जीतू यादव और उनके समर्थकों पर आरोप लगाए थे। मामले ने तब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया था और भाजपा नेतृत्व ने जीतू यादव के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की थी। बाद की पुलिस जांच में यादव की प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं होने की बात सामने आई और पूरक चालान में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। यहां यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि पुराने हमले में जीतू यादव पर आरोप लगे थे, लेकिन बाद की पुलिस जांच में उन्हें प्रत्यक्ष भूमिका से राहत मिली।
पार्टी में वापसी पर पहले भी कालरा ने जताया था विरोध
18 अगस्त को जीतू यादव की भाजपा सदस्यता बहाल होने के बाद ही इंदौर भाजपा के भीतर असहमति सामने आ गई थी। कमलेश कालरा ने 25 अगस्त को प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर निष्कासन समाप्त करने का विरोध किया था। उस समय भी उन्होंने कहा था कि मामला न्यायालय में है और वह अपनी आपत्ति संगठन के सामने रखेंगे। अब MIC में वापसी के बाद विवाद का दूसरा दौर शुरू हो गया है।
इंदौर BJP की अंदरूनी सियासत फिर गरम
जीतू यादव की MIC में वापसी को सिर्फ नगर निगम का प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि इंदौर भाजपा के अंदरूनी राजनीतिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी वापसी का रास्ता भोपाल में वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई चर्चा के बाद साफ होने की स्थानीय रिपोर्ट है। इसके बाद महापौर ने औपचारिक आदेश जारी किया। वहीं कालरा के खुले विरोध ने साफ कर दिया है कि संगठन का फैसला फिलहाल सभी स्थानीय नेताओं को स्वीकार नहीं है।
अब नजर BJP संगठन के अगले कदम पर
कमलेश कालरा के परिवार सहित धरने पर बैठने के बाद अब सवाल यह है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व इस विरोध पर क्या रुख अपनाता है। एक ओर जीतू यादव को पुलिस जांच के बाद पार्टी और MIC दोनों में वापस लाया गया है, दूसरी ओर उसी पार्टी के पार्षद कालरा खुले तौर पर फैसले का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर समझाइश, बैठक या नया राजनीतिक हस्तक्षेप देखने को मिल सकता है।