नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव और ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली में भी बदलाव जरूरी है।
‘ग्लोबल साउथ’ को नियम बनाने में मिले भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल उन नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जिन्हें दूसरे देश तय करते हैं। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक नीतियों और नियमों को आकार देने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने इस दिशा में BRICS को एक महत्वपूर्ण मंच बताया।
वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर जोर
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र समेत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं की संरचना आज की दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। लंबे समय से लंबित सुधारों को अब और टालना उचित नहीं है।
BRICS की बढ़ती ताकत का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने BRICS की बढ़ती वैश्विक अहमियत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समूह दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में BRICS के फैसलों और पहलों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और भू-राजनीतिक चुनौतियों समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच सम्मेलन को विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी
नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को खास बना रही है। विभिन्न देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर बातचीत भी हो सकती है।
भारत का फोकस क्या है?
भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS सम्मेलन के जरिए नई दिल्ली विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है। पीएम मोदी के उद्घाटन संबोधन में भी इसी व्यापक सोच की झलक दिखाई दी।