उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा रहा है। राज्य के 5 जिलों में आज भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कई अन्य इलाकों में भी गरज-चमक और तेज बौछारों का दौर जारी रहने की संभावना है। इस बीच धारचूला में भारी बारिश के कारण 170 फीट लंबा बेली ब्रिज बह गया, जिससे चीन सीमा से लगी कई महत्वपूर्ण घाटियों का संपर्क टूट गया है। उधर, केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी रात में मलबा और बड़े बोल्डर आने से यात्रियों को कुछ समय के लिए रोका गया। हालांकि रास्ता अनुकूल होने के बाद पैदल यात्रा फिर शुरू कर दी गई।
170 फीट का पुल बहा, चीन सीमा से लगी तीन घाटियों का संपर्क टूटा
धारचूला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद कुलागाड़ नदी उफान पर आ गई। तेज बहाव की चपेट में आने से 170 फीट लंबा बेली ब्रिज बह गया। इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से चीन सीमा के साथ व्यास, दारमा और चौदास घाटियों का संपर्क एक बार फिर प्रभावित हो गया है। क्षेत्र में आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता अब 15 सितंबर से प्रस्तावित आदि कैलाश यात्रा को लेकर है। मार्ग बाधित होने के कारण यात्रा शुरू होने में देरी की आशंका जताई जा रही है।
पांच जिलों में यलो अलर्ट, देहरादून-टिहरी में झमाझम बारिश
आईएमडी ने आज देहरादून, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और उत्तरकाशी में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों के अलावा प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। अलर्ट के बीच देहरादून और टिहरी में बारिश का दौर जारी है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और मलबा आने का खतरा भी बना हुआ है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर फिर आया मलबा, 1 हजार यात्री रोके गए
गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा हेलीपैड के पास रात में फिर मलबा और बोल्डर आ गए। मार्ग की सुरक्षा को देखते हुए सुबह सोनप्रयाग और गौरीकुंड में करीब 1 हजार यात्रियों को रोक दिया गया। मौसम और रास्ते की स्थिति अनुकूल होने के बाद करीब साढ़े नौ बजे पैदल यात्रा दोबारा शुरू कर दी गई। डीडीएमए की टीम लगातार मार्ग से मलबा हटाने के काम में जुटी है। हालांकि, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही फिलहाल बंद है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम और मार्ग की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
पहाड़ से मलबा गिरा, सेब के बगीचे दबे; मकानों में भी घुसा मलबा
भारी बारिश के बाद देर रात पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने से इलाके में नुकसान की भी खबर है। कई सेब के बगीचे मलबे में दब गए, जबकि कुछ मकानों में भी मलबा घुस गया। घटना की सूचना के बाद प्रशासन ने टीम को मौके पर भेजा है। अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। फिलहाल किसी व्यक्ति के हताहत होने या पशुओं के मारे जाने की सूचना नहीं है।
अगस्त में बना था नया पुल, कुछ ही दिनों में बारिश ने बहा दिया
कुलागाड़ में पुल बहने की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी स्थान पर कुछ सप्ताह पहले भी बोल्डर गिरने से पुराना पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। 18 अगस्त को बोल्डर गिरने से पुराना पुल ध्वस्त हुआ था। इसके बाद बीआरओ ने सात सीमेंटेड कलवर्ट डालकर तीसरे दिन अस्थायी रास्ता तैयार किया था। इसके बाद 23 अगस्त से नए बेली ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ और महज पांच दिन में 27 अगस्त को पुल तैयार कर दिया गया। 28 अगस्त से इस पर यातायात भी शुरू हो गया था। लेकिन अब भारी बारिश और कुलागाड़ के तेज बहाव ने इस नए पुल को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
13 से 15 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?
13 सितंबर
बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का यलो अलर्ट है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश के दौर जारी रह सकते हैं।
14 सितंबर
पर्वतीय जिलों में बारिश के तेज दौर के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
15 सितंबर
प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। आकाशीय बिजली को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
11 सितंबर को भी केदारनाथ मार्ग पर बिगड़ा था हाल
इससे पहले 11 सितंबर को भी प्रदेश में बारिश के दौरान रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने की घटना सामने आई थी। चीरबासा हेलीपैड के पास करीब 150 मीटर क्षेत्र में भारी लैंडस्लाइड हुआ था। पहाड़ी से मलबा और बड़े पत्थर आने के कारण गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग बंद हो गया था। सुरक्षा के मद्देनजर सुबह 11 बजे से यात्रियों की आवाजाही रोककर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया। बाद में दोपहर करीब ढाई बजे के बाद मार्ग की स्थिति में सुधार होने पर यात्रा फिर शुरू कर दी गई। डीडीएमए की टीम मौके पर पहुंचकर मलबा और पत्थर हटाने में जुटी रही।