नई दिल्ली - पैकेट में मिलने वाले ज्यादा शुगर, नमक और फैट वाले खाद्य उत्पादों पर साफ चेतावनी लिखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI से कई अहम सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने कहा कि खासकर बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए पैकेट के सामने ऐसी जानकारी होनी चाहिए, जिसे आम लोग आसानी से समझ सकें। FSSAI को इन सवालों पर 10 दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

लाल रंग के हेक्सागन में चेतावनी का प्रस्ताव
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI के नए प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की। प्राधिकरण ने पैकेट के सामने लाल रंग के छह कोने वाले निशान यानी हेक्सागन के जरिए चेतावनी देने का सुझाव दिया है।
इस निशान में जरूरत के मुताबिक—
- HIGH FAT
- HIGH SUGAR
- HIGH SALT
- HIGHLY SWEETENED BEVERAGE
जैसी चेतावनियां लिखने का प्रस्ताव है। यह चेतावनी पैकेट के पीछे दी गई पोषण संबंधी जानकारी से एक पॉइंट बड़ी रखने की बात कही गई है।
दो चरणों में लागू करने की तैयारी
FSSAI ने फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है। पहले चरण में उन खाद्य उत्पादों पर चेतावनी लगाने की बात है, जिनमें दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व तय सीमा से अधिक होंगे। दूसरे चरण में ऐसे उत्पादों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है, जिनमें केवल शुगर, नमक या फैट में से किसी एक की मात्रा ज्यादा होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी खाद्य उत्पाद में सिर्फ शुगर, सिर्फ नमक या सिर्फ फैट की मात्रा अधिक है, तो उसे पहले चरण में चेतावनी से बाहर क्यों रखा जाए। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि ज्यादा शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट अलग-अलग तरीकों से स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ‘हाई फैट’, ‘हाई शुगर’ और ‘हाई साल्ट’ वाले उत्पादों की परिभाषा और सीमा क्या होगी।
दोनों चरणों के बीच समयसीमा पर भी सवाल
बेंच ने FSSAI के दो चरणों वाले प्रस्ताव में समयसीमा की कमी पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि अगर दोनों चरणों के बीच समय तय नहीं किया गया, तो दूसरे चरण को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने सुझाव दिया कि अगर नियम दो चरणों में लागू किए जाते हैं, तो दोनों के बीच की अवधि स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। एक विकल्प यह भी हो सकता है कि पहले सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य उत्पादों पर चेतावनी लगाई जाए और बाद में कम स्तर वाले उत्पादों को दायरे में शामिल किया जाए।
बच्चों की सेहत को लेकर चिंता
मामले में याचिकाकर्ता का मुख्य जोर बच्चों और आम उपभोक्ताओं को पैकेटबंद खाद्य पदार्थों की वास्तविक पोषण संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने पर है। फ्रंट लेबलिंग का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि ग्राहक खरीदारी से पहले ही समझ सकें कि किसी उत्पाद में शुगर, नमक या फैट की मात्रा कितनी अधिक है। अब FSSAI के जवाब के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि चेतावनी की सीमा, लागू करने की समयसीमा और सिंगल-न्यूट्रिएंट वाले उत्पादों को लेकर नियम किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।