उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के बीच बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं और करीब 4 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान भी तेज हो गया है। पीलीभीत में शारदा नदी के तेज बहाव ने नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ा दिया है। वहीं बाराबंकी में भी पिछले कुछ दिनों से लगातार कटान की वजह से जमीन और मकानों के नदी में समाने की स्थिति बनी हुई है।
शारदा के कटान से मची तबाही, मकान और पेड़ तक नदी में बहे
पीलीभीत में शारदा नदी का बहाव तेज होने के बाद किनारों पर कटान की रफ्तार बढ़ गई है। नदी के तेज बहाव में किनारे बने मकानों और बड़े पेड़ों के बहने की जानकारी सामने आई है। बाराबंकी में भी हालात चिंताजनक हैं। बताया जा रहा है कि पिछले 10 दिनों में सैकड़ों बीघा जमीन और कई मकान नदी में समा चुके हैं। लगातार हो रहे कटान से नदी किनारे रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
गंगा खतरे के निशान के करीब, गांवों में घुसा पानी
कानपुर और उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी के किनारे बसे गांवों में कई स्थानों पर पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ इलाकों में पानी की गहराई करीब 10 फीट तक पहुंचने की बात सामने आई है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
प्रयागराज में फिर चढ़ने लगा गंगा-यमुना का पानी
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जलस्तर बढ़ने का असर संगम क्षेत्र के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। संगम के प्रमुख घाट पानी में डूब चुके हैं, जबकि लेटे हनुमान जी का मंदिर भी करीब 14 दिनों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। बढ़ते जलस्तर के कारण संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं और प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है।
वाराणसी में घाटों के ऊपर बह रहा पानी, छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों पर स्थिति सामान्य नहीं है। कई घाटों के ऊपर से पानी बहने लगा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी भरने के कारण अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। यहां छतों पर अंतिम संस्कार किए जाने की स्थिति सामने आई है।
नेपाल की बारिश ने बढ़ाई यूपी के सीमावर्ती इलाकों की मुश्किल
उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति पर नेपाल में हो रही लगातार बारिश का भी असर दिखाई दे रहा है। लखीमपुर खीरी में नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के इलाकों में पानी का दबाव बढ़ गया है। इसका असर दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों तक पहुंच गया है, जहां बाढ़ का पानी दाखिल होने की जानकारी सामने आई है।
60 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट
बाढ़ के बीच मौसम विभाग ने बारिश को लेकर भी बड़ा अलर्ट जारी किया है। शनिवार सुबह लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत 30 से ज्यादा शहरों में बादल छाए रहे। कुछ स्थानों पर हल्की धूप भी दिखाई दी। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में प्रदेश के 60 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त बारिश परेशानी बढ़ा सकती है।
खराब मौसम से दिल्ली-वाराणसी फ्लाइट भी प्रभावित
शुक्रवार को लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और झांसी समेत करीब 20 शहरों में तेज बारिश हुई। खराब मौसम का असर हवाई यातायात पर भी देखने को मिला। दिल्ली से वाराणसी जा रही इंडिगो की फ्लाइट को मौसम खराब होने के कारण लखनऊ डायवर्ट किया गया। विमान ने रात करीब 9:45 बजे लखनऊ में सुरक्षित लैंडिंग की।
मानसून अब अंतिम दौर में, जल्द कमजोर पड़ सकती है बारिश
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक उत्तर प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ सकता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने और बारिश में कमी आने की संभावना है। हालांकि स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादलों के कारण कुछ इलाकों में हल्की बारिश जारी रह सकती है।
बाढ़ से राहत कब मिलेगी?
एक तरफ मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में 60 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, वहीं दूसरी ओर मानसून के कमजोर पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले कुछ दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। नदियों का जलस्तर, कटान और बारिश की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी बनी हुई है। खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।