अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल शिपमेंट को सीमित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह कदम संघर्ष-विराम समझौते का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।
तेल टैंकरों से शुल्क वसूली पर कड़ी चेतावनी
- डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों से किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ईरान के रवैये पर सवाल उठाए और इसे समझौते के विपरीत बताया।
जहाजों की आवाजाही घटी, वैश्विक चिंता बढ़ी
- रिपोर्ट्स के अनुसार, संघर्ष-विराम के बाद से इस अहम समुद्री मार्ग से जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है।
- इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि यह मार्ग दुनिया के बड़े हिस्से के कच्चे तेल के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया पर नजर
- अमेरिका ने ईरान द्वारा संभावित शुल्क वसूली की खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
- हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस मामले में अमेरिका कोई ठोस कदम उठाएगा या नहीं।
ईरान का पक्ष
- ईरान की ओर से कहा गया है कि कुछ शर्तों के साथ जहाजों का सुरक्षित आवागमन संभव है।
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जहाजों को ईरानी सेना के साथ समन्वय बनाकर और तकनीकी मानकों का पालन करते हुए गुजरना होगा।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
- होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
- दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है।
भारत पर संभावित असर
- भारत जैसे देश, जो कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो सकते हैं।
- अगर इस मार्ग में रुकावट आती है, तो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, सप्लाई चेन पर असर और महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है।
बढ़ते तनाव के संकेत
- डोनाल्ड ट्रंप के बयान से साफ है कि संघर्ष-विराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।