मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2026-27 की ग्रीष्मकालीन गणना में इस बार 10 हजार 742 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले करीब 1200 अधिक है। वन विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण और बेहतर पर्यावरणीय प्रबंधन का सकारात्मक परिणाम बताया है।
तीन दिनों तक चला प्रदेशव्यापी सर्वे
गिद्धों की गणना 22 से 24 मई 2026 के बीच प्रदेश के सभी 16 वन वृत्तों, 9 टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम क्षेत्रों और अन्य संरक्षित इलाकों में की गई। यह प्रक्रिया सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक संचालित हुई। अभियान में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ स्वयंसेवक, पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक भी शामिल रहे।
पहली बार ऑनलाइन एप से की गई निगरानी
इस बार गिद्ध गणना के लिए विशेष ऑनलाइन एप का उपयोग किया गया। गणनाकर्मियों ने मौके पर ही आंकड़े एप में दर्ज किए, जिससे जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचती रही। इससे पूरी रिपोर्टिंग प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी बनी।
प्रदेशभर से प्राप्त आंकड़ों के संकलन के लिए वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया था। एप आधारित गणना के लिए पहले अधिकारियों, मास्टर ट्रेनर्स और स्वयंसेवकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया।
9 हजार से अधिक वयस्क गिद्ध दर्ज
गणना के अनुसार कुल 10,742 गिद्ध पाए गए, जिनमें 9,394 वयस्क और 1,348 किशोर गिद्ध शामिल हैं। इससे पहले वर्ष 2025 में प्रदेश में 9,509 गिद्ध दर्ज किए गए थे। ऐसे में इस बार संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है।
इस तरह होती है गिद्धों की गणना
गणनाकर्मी सूर्योदय के तुरंत बाद तय किए गए घोंसलों और विश्राम स्थलों पर पहुंचते हैं। वहां मौजूद गिद्धों और उनके बच्चों की संख्या दर्ज की जाती है और एप के जरिए जानकारी अपलोड की जाती है। सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए उड़ते हुए गिद्धों को गणना में शामिल नहीं किया जाता।