भोपाल। आगामी जनगणना को सुचारू और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए केंद्र सरकार ने अहम निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला 31 मार्च 2027 तक न किया जाए।
मध्यप्रदेश में 1.90 लाख कर्मचारी होंगे प्रभावित
मध्यप्रदेश में लगभग 1.90 लाख अधिकारी-कर्मचारी जनगणना ड्यूटी में तैनात किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षक, पटवारी, ग्राम सचिव और स्थानीय निकायों के कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी पर तबादला प्रतिबंध लागू रहेगा।
दो चरणों में होगी जनगणना की प्रक्रिया
जनगणना का पहला चरण हाउस लिस्टिंग के रूप में अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कराया जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। दोनों चरणों के लिए एक ही टीम को निरंतर जिम्मेदारी दी जाएगी।
विशेष परिस्थितियों में मिल सकती है छूट
तबादलों पर लगी यह रोक मुख्य रूप से उन कर्मचारियों पर लागू होगी जो सीधे जनगणना कार्य से जुड़े हैं। हालांकि प्रशासनिक मजबूरी, गंभीर चिकित्सा कारण या अन्य असाधारण परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से तबादले किए जा सकेंगे।
प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर भी रोक
जनगणना की प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक जिलों, तहसीलों, नगर निकायों और वार्डों जैसी प्रशासनिक सीमाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
लक्ष्य: बिना बाधा पूरी हो जनगणना
सरकार का उद्देश्य है कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा में और बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के पूरी हो। इसी कारण यह सख्त व्यवस्था लागू की गई है।