मप्र शराब घोटाले के मामले में अब ED की एंट्री हो गई है। लेकिन अभी भी जांच एजेंसियां देश के सबसे बड़े शराब घोटाले से कोसों दूर हैं। मप्र में भ्रष्ट नेताओं, अफसरों और शराब ठेकेदारों ने मिलकर घोटाले को अंजाम दिया है। ये फ़र्ज़ी एफडीआर घोटाला भोपाल, जबलपुर संभाग के कटनी, इंदौर और रीवा संभाग के सीधी में सामने आ चुका है। अंदेशा है कि इन घोटालों के तार प्रदेश के सभी जिलों से जुड़े हो सकते हैं। क्योंकि पूरे प्रदेश में शराब का सिंडिकेट सोम डिस्टलरीज के संचालक जगदीश अरोरा और उनके साथी ही संचालित कर रहे हैं। जिसमें आबकारी विभाग के अधिकारी और प्रदेश सरकार के आबकारी मंत्री तक सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
मप्र शराब घोटाले के मामले में अब ED की एंट्री हो गई है। लेकिन अभी भी जांच एजेंसियां देश के सबसे बड़े शराब घोटाले से कोसों दूर हैं।
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