धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी काशी में मकर संक्रांति महापर्व गुरुवार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बावजूद भोर से ही श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। दशाश्वमेध, शीतला, राजेंद्र प्रसाद, दरभंगा, शिवाला, राणा महल, अस्सी, भदैनी और रविदास घाट सहित प्रमुख घाटों पर स्नान-दान का सिलसिला दिनभर चलता रहा। गंगा तटों पर उमड़ी भीड़ ने यह संदेश दिया कि आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी फीकी पड़ जाती है।
बाबा विश्वनाथ धाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब
मकर संक्रांति के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु भक्ति भाव से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करते नजर आए।
सूर्यदेव की आराधना का महापर्व
बटुक भैरव मंदिर के महंत एवं ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी के अनुसार मकर संक्रांति सूर्यदेव की आराधना का प्रमुख पर्व है। यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है, जिसे उत्तरायण का आरंभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है और सुबह चार बजे से दोपहर तीन बजे तक का समय अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
स्नान-दान से पुण्य लाभ की मान्यता
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 14 जनवरी की रात 9 बजकर 36 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके थे, जबकि संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को उदया तिथि में रहा। मान्यता है कि गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में इस दिन स्नान और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। दशाश्वमेध मार्ग स्थित खिचड़िया स्थल पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां चावल, दाल, सब्जी, काले तिल, उड़द की दाल और फलों का दान किया गया।
सुरक्षा और यातायात के कड़े इंतजाम
मकर संक्रांति के मद्देनज़र प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए। गंगा घाटों की ओर जाने वाले मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू किया गया और गोदौलिया से मैदागिन मार्ग को ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) अंशुमान मिश्रा के अनुसार प्रमुख घाटों की ओर किसी भी प्रकार के वाहन की अनुमति नहीं दी गई है और बड़े वाहनों के प्रवेश पर भी पूरी तरह रोक रही। अनुमान है कि इस महापर्व पर काशी में लगभग चार लाख श्रद्धालु पहुंचे।
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