Ujjain: उज्जैन (Isckon Temple Ujjain) में बनी श्रील प्रभुपादजी की मूर्ति अब पश्चिम बंगाल के मायापुर में बन रहे विश्व के सबसे बड़े इस्कान मंदिर में प्रतिष्ठित होगी। श्रील प्रभुपादजी के साथ उनके चार गुरुओं की मूर्तियां भी स्थापित की जाएंगी। इन मूर्तियों की खास बात यह है कि यह सैंकड़ों साल तक खराब नहीं होती है। इन सभी मूर्तियों का नर्माण रियलस्टिक मूर्तिकार अमल भक्तदास प्रभुजी ने किया है।
विश्व का पहला रियलस्टिक मूर्ति निर्माण संस्थान
बता दें कि उज्जैन इस्कॉन मंदिर (Isckon Temple Ujjain) में विश्व का पहला रियलस्टिक मूर्ति निर्माण संस्थान हैं, यहां बनी हुई मूर्तियां देश-विदेश के कोने-कोने तक भेजी जाती हैं। इसका संचालन रियलस्टिक मूर्तिकार अमल भक्तदास प्रभु द्वारा किया जाता है। उनके हाथों का जादू ही कमाल का है। इनकी खासियत ये है कि मार्बल डस्ट से बनी ये मूर्तियां दिखने में सजीव लगती हैं।
1500 से लेकर 5 लाख रुपये तक की है कीमत
जानकारी के लिए बता दें कि मूर्ति निर्माण संस्थान में साढ़े चार इंच से छह फीट तक की मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। इन मूर्तियों की कीमत 1500 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक है। इस्कान के अलावा कोई भी व्यक्ति अथवा संस्थान अपने यहां स्थापित करने के लिए यहां मूर्ति बनवा सकते हैं।
दरअसल, रियलस्टिक मूर्ति बनाने के लिए मार्बल डस्ट में रेजिन तथा कलर पिगमेंट कैमिकल के साथ फायबर मिलाया जाता है। सूखने के बाद यह मिश्रण पत्थर की तरह सख्त हो जाता है। इससे बनी मूर्तियां सैकड़ों साल तक खराब नहीं होती हैं।
कई संस्थानों के लिए बनाते है मूर्ति
देश विदेश के इस्कान मंदिरों के अलावा उज्जैन के मूर्ति निर्माण संस्थान ने वृंदावन स्थित राधा रमण मंदिर, मुंबई की सांईं संस्थान के लिए नारायण बाबा की मूर्ति, कोलकाता के कठिया बाबा संप्रदाय के लिए उनके गुरुदेव की मूर्ति, सोलापुर के रामदास बाबा की मूर्तियों का भी निर्माण किया है।
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