राजस्थान से एक बाघ मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में घुस गया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। देश में चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए अफ्रीका से चीतों को लाकर कूनो पार्क में ही रखा गया है। कूनो के निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया कि, दो से तीन दिन पहले कूनो के अंदर बाघ के पैरों के निशान पाए गए थे। उन्होंने कहा कि बाघ से चीतों को कोई सीधा खतरा नहीं है। क्योंकि उन्हें पार्क में बाड़ों या 'बोमास' में रखा गया है।
रणथंभौर से गायब हुआ 3 साल का बाघ
वहीं अधिकारियों ने कहा कि, लगभग तीन साल का बाघ राजस्थान के रणथंभौर बाघ अभयारण्य से संरक्षित जंगल में घुस गया, जो कूनो से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। बता दें कि, कूनो पार्क में अब सात नर और सात मादा चीते और एक शावक है। इस साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कूनो लाए गए थे। इसके बाद पार्क में चार शावकों का जन्म हुआ था, जिससे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई। अधिकारियों ने पहले कहा था कि, मार्च से अब तक तीन शावकों समेत नौ चीतों की मौत हो चुकी है। जबकि 14 चीते और एक शावक स्वस्थ हैं। दरअसल, भारत में 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था।‘कुनो में टाइगर का आना आश्चर्यजनक नहीं’
बता दें कि, बाघ पिछले साल नवंबर में राजस्थान की सीमा पार कर मध्य प्रदेश के मुरैना में घुस गया था। राजस्थान वन विभाग ने अपने एमपी समकक्षों को इसके बारे में सूचित किया था। रणथंभौर से निकलने के बाद टाइगर एमपी सीमा के करीब धौलपुर के जंगल में पहुंचने से पहले गंगापुर के करीब मानव बस्तियों के पास घूमता रहा। अधिकारियों ने कहा कि कुनो में टाइगर का आना आश्चर्यजनक नहीं था क्योंकि यह प्रवास पर था। 2020 में, चंबल के बीहड़ों को पार करने और मध्य प्रदेश के कुनो-पालपुर क्षेत्र में प्रवेश करने के लगभग एक दशक बाद बाघ इस मार्ग से रणथंभौर लौट आया था।Read More: MP में रेत माफिया का आतंक, अवैध खनन रोकने गए पटवारी को ट्रैक्टर से कुचला
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