CG NEWS : रामायण कल में जिस क्षेत्र को दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था चौथी,पांचवी शताब्दी में गौंड राजाओं ने ऐसा साम्राज्य बनाया की 36 किले के गढ़ को छत्तीसगढ़ के नाम से जाना गया... 1 नवंबर, 2000 यानी आज से 20 साल पहले, मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया था। पौराणिक नाम की बात की जाए तो इसका नाम कौशल राज्य (भगवान श्रीराम की ननिहाल) है। गोंड जनजाति के शासनकाल के दौरान लगभग 300 साल पहले इस राज्य का नाम छत्तीसगढ़ रखा।
पृथक राज्य की मांग एवं राज्य गठन
पृथक राज्य की परिकल्पना छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता आंदोलन के साथ ही विकसित हुए.... 1918 में इस पृथक छत्त्तीसगढ़ की मांग के लिए प्रथम परिकल्पना प. सुंदरलाल शर्मा ने की थी....छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य बनाने की मांग लिए 1956 में राजनांदगांव में "छत्तीसगढ़ महासभा का आयोजन किया गया इसके बाद 1967 में राजसभा सदस्य डॉ. खूबचन्द बघेल ने इस जन आंदोलन का रूप लेते हए "छत्तीसगढ़ भ्रातृसंघ" का गठन किया उसके बाद प्यारेलाल कंवर,चंदूलाल चंद्राकर ने इस आंदोलन को विस्तार दिया। 1 नवम्बर 2000 वह तारीख था जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश का 26 वां राज्य बना... छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर बनी उसके बाद बिलासपुर में हाईकोर्ट की स्थापना हुई
छत्तीसगढ़ राज्य की राजनीतिक दौर
छत्तीसगढ़ में अगर राजनितिक की बात करे तो ज्यादा लंबा सफर नहीं रहा लेकिन यह इतिहास बहुत ही दिलचस्प है और इसी लिए आज सरकार में हम उस आपको पूरी दिलचस्प इतिहास की दस्ता बताएँगे। ... एक कलेक्टर, एक डॉक्टर, और एक किसान तीन ऐसे यक्ति जिसे राजनितिक विरासत में नहीं मिली थी लेकिन नियति ने इन्हे चुना छत्तीसगढ़ राजनितिक विरासत को गाड़ने के लिए...1939 में कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में पहली बार अलग छत्तीसगढ़ की मांग उठाई गयी थी। इसके बाद समय समय पर कई सगठनों ने आंदोलन चलाए। विद्याचरण शुक्ल ने अलग छत्तीसगढ़ की मांग को 90 के दशन के खत्म होते होते काफी तेज कर दिया था.. ऐसे माहौल में 1998 -99 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए अटल बिहारी वाजपयी ने रायपुर आए और एक रैली में जनता से वादा किया मैं लेकिन अटल बिहारी बाजपेयी का कहना था की मुझे यहाँ के 11 लोकसभा सीटे जीतकर दीजिये, मैं छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा जब 1999 में NDA की सरकार बनी और अटल बिहारी वाजपयी प्रधानमंत्री बन गए। एक तो खुद अटल बिहारी के ऊपर रायपुर की जनता से अलग पृथक छत्तीसगढ़ का वादा था। दूसरी बीजेपी की राजनीति लम्बे समय से छोटे राज्यों की पक्ष धर रही थी। संकल्प के साथ सत्ता मिली तो छत्तीसगढ़ राज्य की लकीरे समय के मानचित्र पर खींचने लगी...तब मध्यप्रदेश के तीन संभाग रायपुर, बिलासपुर, बस्तर। जिसमे 16 जिले 96 तहसीले 146 विकासखंड के साथ मध्य्प्रदेशा से अलग होकर 26 वां राज्य छत्तीसगढ़ का गठन हो गया
जब दिग्विजय ने अजित जोगी की, भविष्यवाणी की
31 अक्टूबर 2000 वह तारीख जब छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यंमत्री के रूप में अजित जोगी के नाम का ऐलान हुआ था इसके पीछे जो लंबी प्रक्रिया हुई, बैठके हुई इन सब के पीछे का उद्देश्य था विद्याचरण शुक्ल को सीएम बनने से रोकना। इसके लिए एक तगड़ा तर्क यह दिया की आदिवासी बहुल राज्य में आदिवासी मुखयमंत्री बनाया जाये, छत्तीसगढ़ के विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भेंट की थी और बाद में अजित जोगी का नाम फ़ाइनल हुआ था..... जब छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश से अलग नहीं हुआ था तब अजित जोगी खुद 14 साल तक कलेक्टर की पोस्ट पर कई स्थानो पर रहे, साथ ही उन्होंने शहडोल में प्रशासनिक सेवा दी सीधी से पड़ता है चोरहट यानि मध्यप्रदेश के तत्कालीन कद्दावर नेता अर्जुन सिंह का गढ़ कहा जाता है की अर्जुन से अजित जोगी बहुत ही प्रभावित थे। अर्जुन सिंह चाहते थे की अजित जोगी कांग्रेस की राजनीति करे..... इसके लिए राजीव गाँधी को माना भी लिया था उस समय मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे दिग्विजय सिंह बात है 1986 की है, विशेष विमान लेकर दिग्विजय सिंह इंदौर पहुंचे कहते है की अजित जोगी गहरी नींद में सो रहे थे तभी एक फ़ोन आया वह फ़ोन था राजीव गाँधी के मुख्य सचिव का "विंसिं जॉर्ज" का यह फ़ोन कॉल उनके जिंदगी बदलने वाला था.... राजीव गाँधी के सचिव के फ़ोन के ढाई घंटे बाद अजित जोगी फिर कमिश्नर नहीं रह गए उन्होंने प्रशासनिक सेवा के पद से त्याग पत्र दे दिया और वह नेता अजित जोगी बन गए। अजित जोगी अपने आत्मकथा " स्वर्ण कण जान: मेरे प्रेरणास्रोत " में लिखा- आईएएस की नौकरी छोड़ कर राजनीति में आने को लेकर मैंने दिग्विजय सिंह से सलाह माँगा थी और तब दिग्विजय ने भविष्यवाणी की थी की जब भी प्रदेश में किसी आदिवासी के मुख्यमंत्री बनने की बात आएगी तो प्रदेश का पहला कांग्रेसी आदिवासी बनने का गौरव मुझे ही मिलेगा "
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रेस
1 नवंबर 2000 में अजित जोगी मुख्यमंत्री बने तो 14 साल बाद दिग्विजय सिंह का भविष्यवाणी सही हो गई, लेकिन कहते है की राजनितिक में न कोई दोस्त होता है और न हमेशा दुशमन अतीत बीत चूका था और वर्त्तमान यह था की अजित जोगी को मुख्यमंत्री बनाने की जिम्मेदारी दिल्ली से दिग्विजय सिंह को ही दी गई। दिग्विजय सिंह के बिछाई मिसद पर अजित जोगी कई दावेदारों को पछाड़ कर मुख्यमंत्री बने क्योकि नए नवेले राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रेस में थे विद्याचरण शुक्ल , श्यामा चरण शुक्ल ,मोतीलाल होरा जैसे जिग्गज। दिग्विजय सिंह अजित जोगी के नाम पर मुहर लगाने के बाद जब असन्तुष्टो को बनने के लिए गए तोह खूब हंगामा हुआ अजित जोगी जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने खुद को सपनो का सौदागर कहा शुरू कर दिया नव गठित राज्य छत्तीसगढ़ को मुख्यमंत्री के तौर पर एसफ्रास्ट्रक्चर के सुधार से लेकर कई योजनाओं पर काम करना शुरू किया। अजित जोगी जिस घूम केतु की गति से छत्तीसगढ़ की राजनीति में आये और छा गए... उसी गति से किस्मत का सितारा भी अपना चमक खोने लगा।
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