भोपाल, पीथमपुर में भोपाल गैस कांड के कचरा निपटान को लेकर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने 27 फरवरी से तीन चरणों में पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड अपशिष्ट निपटान के ‘प्रायोगिक परीक्षण' की अनुमति दी है। राज्य के महाधिवक्ता ने यह जानकारी साझा की।
पीथमपुर में भोपाल गैसकांड के कचरे के निपटान को लेकर प्रदेश में जमकर बवाल हुआ था। अब बंद हो चुकी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के लगभग 377 टन खतरनाक कचरे को भोपाल से 250 किलोमीटर और इंदौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन कचरे के निपटान को लेकर बवाल हो गया था। इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा था।
इससे पहले सोमवार को भोपाल गैस कांड के कचरा निपटान का मामला सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच में लिया था। कोर्ट ने केंद्र, मध्य प्रदेश और इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने स्वास्थ्य के अधिकार और इंदौर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए जोखिम के मौलिक मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर ध्यान दिया।
अधिवक्ता सर्वम रीतम खरे के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता पीथमपुर में 337 टन खतरनाक रासायनिक कचरे के निपटान के अधिकारियों के फैसले से चिंतित है। याचिकाकर्ता चिन्मय मिश्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत पेश हुए। शीर्ष अदालत ने केंद्र, मध्य प्रदेश सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा और मामले की सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की।