हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में जाहलमा नाले के पास स्थित दरकी पहाड़ी से लगातार भारी भूस्खलन हो रहा है। इसके चलते संसारी-तिन्दी-तांदी सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। लगातार गिर रहे मलबे और बड़ी-बड़ी चट्टानों के कारण जाहलमा पुल पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले दो दिनों से जारी भूस्खलन के कारण सड़क के दोनों ओर सैकड़ों वाहन फंस गए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मार्ग को सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद कर दिया है।
जाहलमा पुल पर बढ़ा खतरा
जाहलमा नाले के समीप पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन गई है। भूस्खलन के चलते पांगी, तिन्दी और उदयपुर की ओर जाने वाले मालवाहक और यात्री वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई है। सड़क के दोनों ओर ट्रकों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त किरण भड़ाना और उपमंडल अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने हालात का जायजा लेकर बीआरओ को सड़क जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं। बीआरओ की टीमें लगातार मलबा हटाने और वैकल्पिक मार्ग खोलने का काम कर रही हैं। हालांकि पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
फंसे यात्रियों की बढ़ी परेशानी
सड़क बंद होने से कई यात्री और ट्रक चालक पिछले 24 घंटे से अधिक समय से फंसे हुए हैं। कई लोग जान जोखिम में डालकर जाहलमा नाले को पैदल पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
फंसे हुए यात्री सतीश कुमार ने बताया कि वे सीमेंट लेकर जा रहे थे, लेकिन अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण सड़क बंद हो गई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हल्की गाड़ियों को जल्द निकालने का आश्वासन दिया है, लेकिन भारी वाहनों के लिए स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। एक अन्य यात्री ने बताया कि खाने-पीने की सामग्री भी कम होती जा रही है और लोग जंगलों के बीच फंसे हुए हैं। प्रशासन के अनुसार बड़ी गाड़ियों की आवाजाही बहाल होने में 10 से 15 दिन तक लग सकते हैं।
प्रशासन लगातार कर रहा निगरानी
फिलहाल जाहलमा पुल और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह संवेदनशील बना हुआ है। जिला प्रशासन और बीआरओ लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि भूस्खलन रुकता है तो सड़क को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। लाहौल-स्पीति क्षेत्र में ऊंचाई वाली सड़कों और खराब मौसम के कारण अक्सर भूस्खलन जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।