भोपाल । दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद छह माह के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, ऐसे में अक्टूबर की निर्धारित समय-सीमा से पहले उपचुनाव कराए जाने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि जून में चुनाव की अधिसूचना जारी हो सकती है।
सीट रिक्त होने की पृष्ठभूमि
दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता बैंक फ्राड के मामले में सजा होने के बाद समाप्त कर दी गई थी। मध्यप्रदेश विधानसभा ने 2 अप्रैल को उनकी सीट को रिक्त घोषित किया था। इसके 6 महिने यानि 2 अक्टूबर से पहले चुनाव कराया जाना जरूरी है। बारिश में चुनाव होते नहीं है। ऐसे में जून में चुनाव कराए जा सकते हैं। यही वजह है कि चुनाव आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले से जुड़ी कानूनी कार्यवाही दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है, जहां सुनवाई को 14 जुलाई तक टाल दिया गया है।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
उपचुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश पर जिले के सभी 291 मतदान केंद्रों के लिए लगभग 600-600 ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग 19 मई से शुरू की गई है। जिला प्रशासन द्वारा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर आवश्यक प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की गई है। सुरक्षा व्यवस्था, वेबकास्टिंग, स्ट्रांग रूम की निगरानी और तकनीकी जांच जैसे सभी मानक प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
सियासी दलों ने बढ़ाई सक्रियता
उपचुनाव को लेकर सियासी दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। जहां भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा उम्मीदवार होंगे, तो वहीं कांग्रेस पार्टी में प्रत्याशी चयन को लेकर विचार-विमर्श जारी है। पार्टी के भीतर अवधेश नायक या पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के बेटे डॉ. अंकित भारती को मैदान में उतारने पर चर्चा चल रही है। हाल ही में राजेंद्र भारती ने अपने बेटे के साथ दिल्ली में राहुल गांधी समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की थी। इसके बाद यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि पार्टी सहानुभूति लहर का लाभ उठाने के लिए युवा उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती है। वहीं, यदि कांग्रेस अवधेश नायक को टिकट देती है तो पार्टी का लक्ष्य ब्राह्मण और संघ समर्थित वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति माना जा रहा है। हालांकि 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी डॉ.नरोत्तम मिश्रा क्षेत्र में सक्रिय बने हुए हैं,वहीं आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव ने तो चुनाव प्रचार शुरू कर तक कर दिया है।