Bhopal: 13 मई को आए कर्नाटक चुनावों के नतीजों के बाद सोशल मीडिया (MP Election 2023) पर मीम्स और मैसेजस की बाढ़ आई हुई है इन मीम्स में से एक पंक्ति छाई हुई है जिसमें लिखा है - ‘मत करो मामा नाटक, देख लो कर्नाटक’ वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस समर्थक यह भी लिख रहे हैं कि ‘कर्नाटक में अपना काम खत्म करने के बाद अब बजंरगबली ने मध्यप्रदेश की तरफ उड़ान भर ली है।'लेकिन चुनावी दौर में इन सब मीम्स और हंसी मजाक से परे कुछ ऐसे फैक्ट्स भी निकलकर आ रहे हैं जो प्रदेश में बीजेपी के लिहाज से ठीक नहीं हैं।
क्या है ऑपरेशन लोटस?
दरअसल कर्नाटक और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों (MP Election 2023) के चुनावों को इसलिए कम्पेयर किया जा रहा है क्योंकि दोनों ही राज्यों में 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद बीजपी की सरकार ऑपरेशन लोटस के तहत बनाई गई थी। दोनों राज्यों में बीजेपी ने कांग्रेस और अन्य पार्टीयों के विधायकों को तोड़कर बीजेपी में शामिल किया था और अपनी सरकार बनाई थी। लेकिन उसके बाद से बीजेपी गुटों में बंटना चालू हो गई थी जिसके खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।
बीजेपी अलग-अलग ग्रुप में बंटी
विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी की परेशानी दूसरी कोई पार्टी नहीं बल्कि खुद बीजेपी का ही अलग अलग ग्रुप में बंटा होना है। सिंधिया के आने के बाद पार्टी दो ग्रुपस में बंट चुकी है जिसमें एक में वह नेता हैं जो बीजेपी के कोर मेंमर्स हैं और दूसरी तरफ वह नेता हैं जिन्होंने सिंधिया के साथ बीजेपी को ज्वॉइन किया है। खबर हैं कि पार्टी के कोर मेंबर्स सिंधिया समर्थकों को टिकिट मिलने और अन्य बातों से नाराज चल रहे है। अगर इन नेताओं की बात की जाए तो इनमें हिम्मत कोठारी, सत्यनारायण सत्तन, भंवर शेखावत, अनूप मिश्रा, गौरीशंकर शेजवार आदि सहित हाल ही में कांग्रेस में शामिल पूर्वमंत्री दीपक जोशी जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं, बीजेपी यह बात जानती है कि कोर ग्रुप को साधे बिना एमपी में चुनाव जीतना मुश्किल है इसलिए पार्टी ने इन लोगों को मनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, ग्वालियर में सिंधिया ने भी पुराने नेता और कार्यकर्ताओं को मनाने के काम शुरू कर दिए हैं और हाल ही में उन्होंने बीजेपी के कोर ग्रुप के मंडल अध्यक्षों से मुलाकता करके आगे की रणनीति भी बनाई है।
कमलनाथ ने दिया ये बड़ा बयान
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (MP Election 2023) ने बयान दिया है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान कर्नाटक चुनावों में बीजेपी की तरफ से स्टार प्रचारक की भूमिका में थे लेकिन जिस जिस जगह मामा ने चुनाव प्रचार किया था उस सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है और यह संदेश देता है कि मामा का जादू अब खत्म होने लगा है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक में कुल 8 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था जिनमें से बीजेपी को 6 में हार मिली है।
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