रायपुर | छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अरनब’ के प्रभाव के बीच फसलों को संभावित नुकसान और धान खरीदी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश और फसल में नमी के कारण धान खरीदी के दौरान किसानों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि नमी के आधार पर धान खारिज होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने की जताई आशंका
भूपेश बघेल के मुताबिक, चक्रवात के प्रभाव से राज्य के विभिन्न इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि मौसम का असर जितने लंबे समय तक बना रहेगा, किसानों की मुश्किलें उतनी बढ़ सकती हैं। उन्होंने फसल में नमी बढ़ने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने की बात कही। ऐसे में किसानों को अपनी उपज बेचने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
धान खरीदी में किसानों को परेशानी का डर
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होने वाली है। ऐसे में खराब मौसम और फसल में नमी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ सकती है। बघेल ने आशंका जताई कि यदि नमी के आधार पर धान खारिज किया गया, तो किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थितियों में विभागीय अधिकारी किसानों का शोषण कर सकते हैं। हालांकि, धान खरीदी केंद्रों पर ऐसी किसी घटना की पुष्टि के लिए संबंधित अधिकारियों या किसानों के प्रत्यक्ष बयान जरूरी होंगे।
पिछले वर्षों की स्थिति का भी किया जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों में भी इस तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया। धान खरीदी के दौरान नमी की निर्धारित सीमा, उपज की गुणवत्ता की जांच और खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगी। खराब मौसम से प्रभावित किसानों को समय पर जानकारी और उचित व्यवस्था मिलना जरूरी है।
किसानों की निगाहें धान खरीदी की व्यवस्था पर
चक्रवात के प्रभाव और फसल की स्थिति को देखते हुए किसानों के सामने उपज सुरक्षित रखने और समय पर बेचने की चुनौती हो सकती है। धान खरीदी शुरू होने से पहले मौसम की स्थिति, फसल में नमी और खरीदी केंद्रों की तैयारियों पर नजर बनी हुई है।