मध्य प्रदेश में नवंबर-दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है। दोनों के बीच सीट बंटवारे को लेकर भी सहमति बन गई है। 230 सीटों में से 178 पर बीएसपी चुनाव लड़ेगी। जबकि जीजीपी 52 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। अभी तक माना जा रहा था कि कांग्रेस और बीजेपी के बीच यहां कड़ा मुकाबला हो सकता है। पर अब बीएसपी और जीजीपी गठबंधन भी कुछ सीटों पर चौंका सकता है।
‘शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी का मुद्दा उठाएंगे’
बीएसपी-जीजीपी के चुनावी गठबंधन पर बीएसपी नेता और राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम ने कहा, “पहली बार राज्य में एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय एक साथ आएंगे। एसटी ने परंपरागत रूप से दो पार्टियों (भाजपा और कांग्रेस) को वोट दिया है और अब हम एक मजबूत विकल्प पेश करेंगे। हम एससी/एसटी समुदायों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार के मामलों को लेकर हर एक गांव और जंगल में जाएंगे। हम शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाएंगे। जो दो समुदायों को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दे हैं।”
इन सीटों पर बसपा और जीजीपी को मिल सकता है फायदा
मध्य प्रदेश की आबादी में लगभग 16 प्रतिशत दलित हैं। राज्य की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 35 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इनमें से 18 सीटें जीती थीं। जबकि 17 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं थी। वहीं राज्य की आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से अधिक है। जिसमें 47 विधानसभा सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। 2018 के चुनावों में भाजपा एसटी सीटों में से केवल 16 सीटें जीत सकी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटें जीतीं। माना जाता है कि बसपा का समर्थन आधार उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों जैसे बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल बेल्ट में है, जहां दलितों की संख्या अधिक है। वहीं, जीजीपी का पारंपरिक वोट आधार महाकौशल क्षेत्र में स्थित है। मुख्य रूप से बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में, जहां उल्लेखनीय गोंडी आबादी है।
‘बसपा-जीजीपी गठबंधन कोई चुनौती नहीं’
वहीं इस गठबंधन को बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही खारिज कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने कहा, ''मध्य प्रदेश में दो ही पार्टियां हैं। हम छोटी पार्टियों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं।” वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने कहा, “हम बसपा-जीजीपी गठबंधन को कोई चुनौती नहीं मानते हैं। हम केवल भाजपा को वास्तविक चुनौती के रूप में देख रहे हैं और उससे निपटने के लिए काम कर रहे हैं।”
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