निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार को अहम निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के 19 जनवरी 2026 के आदेश के पूर्ण और सख्त अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए दिए गए हैं। यह आदेश रिट याचिका (सिविल) संख्या 1089/2025 मोस्टारी बानू बनाम निर्वाचन आयोग में पारित हुआ था, जिसमें अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया को पारदर्शी, सुगम और आम लोगों के लिए कम से कम तनावपूर्ण बनाए रखने पर जोर दिया था। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े दस्तावेजों का संग्रह, आपत्तियों की सुनवाई और अन्य प्रक्रियाएं ग्राम पंचायत भवनों, प्रत्येक तालुका या उप-मंडल के सार्वजनिक स्थानों, ब्लॉक कार्यालयों तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में आयोजित की जाएंगी।
पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को इन सभी स्थलों पर पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराए, ताकि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में आने वाले करीब 1.25 से 1.36 करोड़ लोगों से जुड़ी आपत्तियों और दस्तावेजों का समयबद्ध निपटारा हो सके। इसके अलावा सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को भी पर्याप्त स्टाफ और सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके।
एसआईआर की गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हों
पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सुनवाई स्थलों पर कानून-व्यवस्था बनी रहे और एसआईआर की गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हों। आयोग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या चूक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की चिंता: आम जनता पर बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान आम लोगों पर पड़ रहे ‘तनाव और दबाव’ पर चिंता जताई थी, क्योंकि राज्य की लगभग 20 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 1.36 करोड़ लोगों को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ से जुड़े नोटिस जारी किए गए थे। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने नामों को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने, अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से दस्तावेज जमा करने और कक्षा 10 के एडमिट कार्ड को वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने जैसे निर्देश दिए थे। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में यह एसआईआर अभियान आगामी 2026 विधानसभा चुनाव (संभावित अप्रैल-मई) से पहले मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
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