इंदौर लगातार सातवीं बार स्वच्छता में नंबर वन आया है। वर्ष 2014 में स्वच्छता रैंकिंग में इंदौर का स्थान 149 वें नंबर पर था। लेकिन तीन साल में गुणात्मक सुधार कर इंदौर पहले स्थान पर आ गया। तब इंदौर ने देश के स्वच्छता में नंबर वन रहे शहर मैसूर को पछाड़ा था।
पहला साल
वर्ष 2017 में तत्कालीन मेयर मालिनी गौड़ ने शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने की कोशिश की। उन्हें साथ मिला भोपाल नगर निगम आयुक्त से तबादला होकर आए मनीष सिंह का। उन्होंने सबसे पहले इंदौर को खुले में शौच से मुक्त करने पर जोर दिया। जगह-जगह शौचालय बनवाए। इसके बाद शहर के कुछ वार्डों में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था लागू की। कचरा उठाने वाली एटूझेड कंपनी का ठेका निरस्त किया और सफाईकर्मियों ने व्यवस्था संभाली। फिर पूरे वार्ड में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन होने लगा और शहर से कचरा पेटियां हटा ली गई। शहर साफ रहने लगा और इंदौर वर्ष 2017 की स्वच्छता रैंकिंग में पहले स्थान पर था।दूसरा साल
वर्ष 2018 में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन को और मजबूत बनाया गया। शहर में शत प्रतिशत गीला और सूखा कचरा संग्रहित होकर ट्रेंचिंग ग्राउंड तक जाने लगा। शहरवासियों की जागरुकता के कारण ही यह संभव हो पाया। चोइथराम मंडी मे बायो सीएनजी प्लांट लगाया गया। शहर में कचरे से खाद बनाई जाने लगी। इसमें रहवासी भी आगे आए।तीसरा साल
वर्ष 2019 में इंदौर ने सड़कों की सफाई के साथ शहर के सभी हिस्सों को साफ-सुथरा रखने की कोशिश शुरू की। सड़कों की सफाई मशीनों से होने लगी। आबोहवा से धूल गायब हो गई और प्रदूषण भी कम हो गया। शहर को आवारा पशुओं से मुक्त किया गया। इस साल निगम ने ट्रेंचिंग ग्राउंड पर फोकस किया और कचरे के पहाड़ से उसे मुक्त कर दिया गया। वहां गार्डन बनाया गया और लोग फोटो शूट के लिए वहां जाने लगे।चौथा साल
वर्ष 2020 में कोरोना की चपेट में पूरा देश था। इंदौर भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था नहीं गड़बड़ाई। शहर में नियमित सफाई हुई। शहरवासियों ने सफाई को लेकर अच्छा फीडबैक दिया। इस नाल बेकलेन को गंदगी से मुक्त करने की मुहिम शुरू की गई। इसके बाद फिर इंदौर लगातार तीसरी बार स्वच्छता में नंबर वन आ गया।पांचवां साल
वर्ष 2021 में इंदौर ने थ्री आर मॉडल पर फोकस किया। बेकार वस्तुएं शहर के सजाने के काम आने लगी। बेकलेन में रंगोली नजर आने लगी। सड़कों पर रंगोलियां सजती थी। इस साल शहर ने सौंदर्यीकरण पर फोकस किया। शहर की दीवारों पर पेंटिंग दिखाई देने लगी। नाले सूखकर मैदान बन गए। वहां स्पर्धाएं होने लगी। इंदौर को वाटर प्लान में फाइव स्टार रेटिंग मिली। शहर पांचवी बार सफाई में पहले स्थान पर रहा।छठा साल
वर्ष 2022 में सफाई से कमाई पर फोकस किया गया। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 500 टन क्षमता का बायो सीएनजी प्लांट शुरू हुआ। कचरे से पैदा हुई गैस से सिटी बसें चलने लगी। शहर के वायु प्रदूषण को रोकने की मुहिम छेड़ी गई। शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर फोकस किया गया। शहर में दस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हुए।सातवां साल
पिछले साल शहर में कई बड़े आयोजन हुए। प्रवासी सम्मेलन, स्मार्ट सिटी काफ्रेंस, जी-20 बैठकों के कारण शहर को सुंदर बनाया गया। इसका फायदा स्वच्छता रैंकिंग में मिला। बेकलेन की सफाई का अभियान बरकरार रखा। वायु प्रदूषण कम करने का अभियान रंग लाया और शहर की आबोहवा बेहतर हो गई। सूरत शहर ने हमे तगड़ी टक्कर दी,लेकिन फिर भी इंदौर सातवीं बार पहले स्थान पर रहा।Read More: सातवीं बार इंदौर बना सबसे स्वच्छ शहर, CM डॉ.मोहन यादव और कैलाश विजयवर्गीय ने लिया अवॉर्ड
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