रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों ‘प्रशिक्षण’ नया सियासी हथियार बनकर उभरा है। एक ओर राष्ट्रीय कांग्रेस का संगठनात्मक प्रशिक्षण अभियान है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का सोशल मीडिया वार। पोस्टर पॉलिटिक्स के जरिए छिड़ी इस जंग ने बयानबाज़ी को और धार दे दी है। सवाल उठ रहा है कि प्रशिक्षण के नाम पर असल लड़ाई विचारधारा की है या सियासी बढ़त की?
बीजेपी का ‘हाईटेक’ तंज, कांग्रेस पर सीधा निशाना
हाल ही में बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक कार्टून पोस्टर जारी कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पोस्टर में लिखा गया—“फर्क साफ़ है।”
बीजेपी ने अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम को हाईटेक बताते हुए दावा किया कि कार्यकर्ताओं को AI तकनीक के जरिए प्रदेश के लोगों के हित में काम करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इसी पोस्टर में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए लिखा गया कि “भूपेश जैसा घोटाला करना है तो जनता का फिर से भरोसा जीतना होगा।”
बीजेपी का दावा है कि उसका प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल नैरेटिव और टेक्नोलॉजी आधारित राजनीति की ओर एक कदम है।
कांग्रेस का पलटवार: “AI नहीं, मुद्दों पर ट्रेनिंग”
बीजेपी के हमले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीजेपी AI की ट्रेनिंग की बात करती है, लेकिन उनके लिए AI का मतलब सिर्फ ‘अमेरिका-इंडिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भर है।
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी असल मुद्दों से भटकाकर झूठ और प्रोपेगेंडा की ट्रेनिंग दे रही है, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता जनता के सवालों और जमीनी समस्याओं पर काम कर रहे हैं।
- दिल्ली में कांग्रेस का संगठनात्मक प्रशिक्षण
- कांग्रेस आलाकमान ने हाल ही में दिल्ली में जिलाध्यक्षों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था।
- छत्तीसगढ़ के 41 जिलाध्यक्ष शामिल हुए
- राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने मार्गदर्शन दिया
- जिलाध्यक्षों ने फीडबैक देकर जमीनी मुद्दों को चिन्हित किया
- अप्रैल में 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर प्रस्तावित
- विचारधारा से लेकर सत्ता में वापसी की रणनीति पर फोकस
कांग्रेस का कहना है कि यह प्रशिक्षण संगठनात्मक मजबूती और विचारधारा को धार देने के लिए है।
बीजेपी का ‘महा प्रशिक्षण’ और डिजिटल फोकस
वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी हालिया नियुक्तियों के बाद पदाधिकारियों को ‘महा प्रशिक्षण’ दिया।
- मोर्चा और प्रकोष्ठ के सदस्यों को विशेष ट्रेनिंग
- AI आधारित नैरेटिव और डिजिटल रणनीति पर जोर
- सोशल मीडिया प्रबंधन और ऑनलाइन कैम्पेनिंग पर फोकस
- बीजेपी इसे भविष्य की राजनीति की तैयारी बता रही है, जहां डिजिटल युद्ध ही असली मैदान माना जा रहा है।
नैरेटिव की लड़ाई या विचारधारा की?
पोस्टर के जरिए शुरू हुई यह सियासी जंग अब बयानबाज़ी से आगे बढ़कर रणनीतिक मुकाबले में बदलती दिख रही है।
दोनों दल अपने-अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य की राजनीतिक तैयारी बता रहे हैं, लेकिन असल मुकाबला नैरेटिव पर कब्जे का दिखाई देता है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में प्रशिक्षण कार्यक्रम अब सिर्फ संगठनात्मक मजबूती का माध्यम नहीं, बल्कि सियासी प्रहार का जरिया बन चुका है। ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ के इस दौर में देखना दिलचस्प होगा कि जनता किस दावे को ज्यादा विश्वसनीय मानती है—हाईटेक ट्रेनिंग का दावा या जमीनी मुद्दों की पैरवी।
Comments (0)