मध्यप्रदेश के लाखों युवाओं और ओबीसी वर्ग की नजर जिस फैसले पर टिकी थी, उस पर गुरुवार, 19 फरवरी को Supreme Court of India ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया। 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को वापस मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को भेज दिया है।
साथ ही अदालत ने साफ किया कि बढ़ाए गए 13 प्रतिशत अतिरिक्त ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट की पूर्व अंतरिम रोक फिलहाल जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस कानून की संवैधानिक वैधता और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच अब हाईकोर्ट ही करेगा।
सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किए जाने के फैसले को लेकर लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार और ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की थी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले पर विस्तार से सुनवाई करने के बजाय इसे जबलपुर हाईकोर्ट को वापस भेजने का निर्णय लिया।अदालत का कहना था कि चूंकि यह मामला राज्य के कानून और संवैधानिक सीमाओं से जुड़ा है, इसलिए इस पर पहले हाईकोर्ट ही विस्तृत विचार करे और अंतिम निर्णय दे।
मध्यप्रदेश शासन ने की थी अंतरिम राहत की मांग
मध्यप्रदेश शासन और ओबीसी वेलफेयर कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर 27 प्रतिशत आरक्षण को लागू मानने और 13 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण के तहत रोके गए पदों के परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी थी। उनका तर्क था कि नियुक्तियों की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है।फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद मामला फिर से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सुना जाएगा।
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