देश को 31 मार्च तक नक्सल मुक्त कराने के व्यापक अभियान के तहत सुरक्षाबलों ने अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक और निर्णायक रूप दिया है। इसी क्रम में केजीएच-2 यानी कर्रेगुट्टा हिल्स ऑपरेशन की शुरुआत मंगलवार से की गई, जिसे नक्सल विरोधी मोर्चे पर एक अहम कदम माना जा रहा है। इस अभियान को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में केंद्रित किया गया है, जहां नक्सलियों की गतिविधियां लंबे समय से चुनौती बनी हुई थीं।
2000 जवानों की मजबूत तैनाती से बढ़ी ऑपरेशन की ताकत
इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सीआरपीएफ, छत्तीसगढ़ पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के करीब दो हजार जवानों को ऑपरेशन में शामिल किया गया है। यह संख्या इस बात का संकेत है कि सुरक्षाबल अब पीछे हटने के बजाय नक्सलियों के बचने की हर संभावना को खत्म करने के लिए पूरी शक्ति और संसाधनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के बीच जवानों की यह तैनाती नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार की दिशा में एक अहम मोड़ मानी जा रही है।
देवजी की मौजूदगी ने तेज की ऑपरेशन की गति
केजीएच-2 ऑपरेशन की शुरुआत का प्रमुख कारण नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में शामिल देवजी उर्फ थिप्परी तिरूपति की मौजूदगी के ठोस इनपुट हैं। सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि वह अपने कुछ करीबी साथियों के साथ छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर सक्रिय है। देवजी नक्सल संगठन की केंद्रीय कमेटी और पोलित ब्यूरो का सदस्य है और नक्सली नेटवर्क का सबसे बड़ा रणनीतिक चेहरा माना जाता है। उसके क्षेत्र में मौजूद होने की जानकारी मिलते ही ऑपरेशन को तुरंत सक्रिय कर दिया गया।
नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व में बचे हैं सिर्फ चार नाम
अधिकारियों के अनुसार नक्सलियों के टॉप लीडरों की सूची अब बहुत छोटी रह गई है। वर्तमान में चार मुख्य चेहरे ही सक्रिय माने जा रहे हैं, जिनमें सबसे ऊपर देवजी है, जो मोस्ट वांटेड की श्रेणी में आता है। तेलंगाना मूल का यह कुख्यात नक्सली लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में है और इसकी गिरफ्तार या समाप्ति को नक्सलवाद उन्मूलन का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।
देवजी का आत्मसमर्पण या अंत—अभियान का मुख्य लक्ष्य
सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान में देवजी को हटाना अत्यंत आवश्यक है। प्राथमिक प्रयास यह है कि वह आत्मसमर्पण करे ताकि संगठन की कमर बिना हिंसा के टूटे। लेकिन यदि ऐसा नहीं होता, तो मुठभेड़ की स्थिति में इसका अंत भी निश्चित माना जा रहा है। देवजी का निष्कासन नक्सली आंदोलन के भविष्य को लगभग समाप्त कर सकता है, क्योंकि उसके बाद संगठन में नेतृत्व का vacuum पैदा हो जाएगा।
नक्सल मुक्त भारत की दिशा में निर्णायक कदम
केजीएच-2 ऑपरेशन न सिर्फ एक सैन्य अभियान है, बल्कि यह उस लंबे संघर्ष का अंतिम चरण भी माना जा रहा है जिसके माध्यम से देश ने नक्सलवाद की जड़ों को खत्म करने का संकल्प लिया है। इस अभियान की सफलता न केवल छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में शांति स्थापित करेगी, बल्कि देश को विकास, सुरक्षा और स्थिरता की ओर नई दिशा भी देगी।
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