छत्तीसगढ़ में एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग, रायपुर केंद्र द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में अगले पांच दिनों तक बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ वज्रपात की संभावना जताई गई है।
विभाग के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी राजस्थान से लेकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक एक द्रोणिका सक्रिय है, जिसका सीधा असर प्रदेश के मौसम पर पड़ेगा। साथ ही मध्य एवं ऊपरी स्तर की पछुआ हवाओं का प्रभाव भी बना हुआ है। मौसम विभाग का कहना है कि 11 मई के बाद बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन अगले कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर बना रहेगा।
कई जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने 10 से 14 मई तक प्रदेश के कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वज्रपात की आशंका जताई है। कुछ इलाकों में हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
11 और 12 मई को भी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है।
इसके साथ ही लोगों को खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े न होने की चेतावनी दी गई है। किसानों को खेतों और मंडियों में रखे उत्पादों को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
रायपुर समेत कई शहरों में तापमान में उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि बीच-बीच में हल्की बारिश और बादलों के कारण लोगों को गर्मी से कुछ राहत भी मिलेगी।
रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
दूसरी ओर पेंड्रारोड में न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। फिलहाल प्रदेश में तापमान में बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है, लेकिन आने वाले दिनों में गर्मी धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है।
इन जिलों में हल्की बारिश की संभावना
सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, बस्तर और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
कुछ इलाकों में बादल छाए रहने और बूंदाबांदी की भी संभावना है। हालांकि यह बारिश व्यापक नहीं होगी और सीमित क्षेत्रों में ही देखने को मिलेगी।