भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और रहली से 9 बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान फिर से सियासी चर्चाओं में आ गया है। सागर जिले के रहली में विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में उसे ठुकरा दिया। गोपाल भार्गव ने कहा कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। जब सरकार किसी की बात नहीं सुनती, तो मनोबल कमजोर हो जाता है। इसके बावजूद उन्होंने 20 वर्षों तक धैर्य और संयम बनाए रखा। “20 साल मन बांधा, ऑफर ठुकराया”
पूर्व मंत्री ने कहा,
“कई बार मंत्री और मुख्यमंत्री कहते थे, दिग्विजय सिंह भी कहते थे,गोपाल जी, बीजेपी में क्या रखा है,आप हमारे पास आ जाइए, आपको अच्छा विभाग दिला दूंगा। लेकिन मैंने राजा साहब से कहा,यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि जहां लोग 20 महीने में ही पाला बदल लेते हैं, वहीं उन्होंने 20 साल तक अपने मन को बांधे रखा और पार्टी के साथ खड़े रहे।
जनता के भरोसे से हुआ विकास
भार्गव ने कहा कि उन्हें हमेशा जनता का साथ मिला। जनता के भरोसे से ही आज विधानसभा क्षेत्र में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भी सरकार मजबूत होगी, वे अपने क्षेत्र के लिए और बेहतर काम करेंगे।
9 बार विधायक, संगठन के मजबूत स्तंभ
गौरतलब है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से 9 बार विधायक चुने जा चुके हैं। वे लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों के मंत्री रह चुके हैं। संगठन में उनकी गिनती भाजपा के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में होती है। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदा कैबिनेट में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला, जिसके बाद से उनके बयानों में नाराजगी और पीड़ा झलकती रही है। इससे पहले भी वे ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं।
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