उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के चौथे दिन भगवान महाकाल का घटाटोप स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भक्तों की भीड़ अपने आराध्य के इस दिव्य रूप के दर्शन के लिए उमड़ पड़ी, और गर्भगृह में की गई विशेष सजावट ने इस पावन अवसर को और भी मनोहर बना दिया। पूरे परिसर में भक्ति का अनूठा वातावरण था, जहाँ हर धड़कन शिवमय प्रतीत हो रही थी।
कोटितीर्थ तट पर पूजन, अभिषेक और वैदिक अनुष्ठान
दिन की शुरुआत मंदिर प्रांगण स्थित कोटितीर्थ के पवित्र तट पर विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न की गई। इस अनुष्ठान ने न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान की, बल्कि वातावरण में वैदिक ऊर्जा का संचार भी किया। शिव नवरात्रि के इस पावन काल में किया गया यह पूजन आत्मिक उत्थान का अद्भुत अवसर बना।
रुद्रपाठ और अभिषेक से गूँजा मंदिर परिसर
मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रुद्रपाठ संपन्न हुआ। मंत्रों की शक्ति और श्रद्धा की भावना ने पूरे माहौल को पवित्रता से सराबोर कर दिया। इसके बाद भगवान महाकाल का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसने भक्तों को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति से भर दिया। अभिषेक के दृश्य ने हर भक्त को भावविभोर कर दिया।
संध्या पूजन और दिव्य घटाटोप श्रृंगार के दर्शन
दोपहर 3 बजे के बाद संध्या पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूजन के पश्चात भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र, रजत मुकुट और शेषनाग का कुंडल अर्पित कर घटाटोप स्वरूप में सुशोभित किया गया। गर्भगृह को गुलाब के फूलों से सजाया गया, और इसकी सुगंध पूरे मंदिर में फैल गई, जिससे भक्तों को अपूर्व आध्यात्मिक अनुभूति मिली। महाकाल का यह स्वरूप भक्तों के लिए आनंद, श्रद्धा और भावनाओं का अद्भुत संगम रहा।
शिव नवरात्रि के प्रत्येक दिन विशेष श्रृंगार के दर्शन
शिव नवरात्रि के पावन अवसर पर 15 फरवरी तक प्रतिदिन संध्या के समय भगवान महाकाल के अलग-अलग पावन स्वरूपों के दर्शन होंगे। 10 फरवरी को छबीना, 11 को होलकर, 12 को मनमहेश, 13 को उमा महेश, 14 को शिव तांडव और 15 फरवरी को सप्तधान मुखौटे के स्वरूप में दर्शन उपलब्ध रहेंगे। यह संपूर्ण पर्व भक्तों के लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना, ऊर्जा और शिवभक्ति का पावन मार्ग है।
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