राजिम| छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक अजीब तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, जहां सरकार को घेरने का काम विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के अपने ही नेता कर रहे हैं। कभी सांसद बृजमोहन अग्रवाल, कभी पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर, तो कभी सदन में वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और राजेश मूणत—सिस्टम और प्रशासन पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में अब राजिम से भाजपा विधायक रोहित साहू भी खुलकर नाराजगी जाहिर करते दिखाई दिए हैं।
राजिम कुंभ कल्प में अव्यवस्था, अफसरों पर भड़के विधायक
छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में इन दिनों कुंभ कल्प मेले का आयोजन चल रहा है। जहां एक ओर श्रद्धालुओं में मेले को लेकर उत्साह है, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजिम कुंभ कल्प के दौरान कलाकारों और स्थानीय लोगों के लिए भोजन की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई। हालात ऐसे बने कि कई लोग भूखे ही मेला परिसर से लौटने लगे। इसी बात से नाराज होकर राजिम विधायक रोहित साहू मौके पर ही अफसरों पर भड़क उठे। गुस्से में विधायक ने न सिर्फ अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई, बल्कि कलाकारों और स्थानीय नागरिकों को होटल ले जाकर अपने खर्च पर भोजन भी करवाया।
“अफसर सरकार की छवि खराब कर रहे हैं”
विधायक रोहित साहू ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि लापरवाही के चलते सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसर जिम्मेदारी लेने के बजाय इवेंट मैनेजमेंट कंपनी और स्थानीय लोगों पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि जनप्रतिनिधि होकर भी उन्हें सख्त रुख अपनाना पड़ा।
सरकार के अपनों ने ही सिस्टम पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ में यह पहला मामला नहीं है जब सत्ताधारी दल के नेताओं ने अपनी ही सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया हो।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपराध की घटनाओं, बर्खास्त B.Ed शिक्षकों और एसीआई में दिल की सर्जरी बंद होने जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पत्र लिखे।
पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कोरबा कलेक्टर को हटाने की मांग को लेकर पीएम मोदी और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।
उन्होंने कलेक्टर पर संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग का भी गंभीर आरोप लगाया।
कांग्रेस ने भी साधा निशाना
राजिम कुंभ की अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भी प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। पूर्व पीसीसी चीफ और अभनपुर के पूर्व विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि अगर प्रशासन मेला आयोजन कराने में नाकाम है तो साफ-साफ बता दे। राजिम और अभनपुर की जनता मिलकर इस ऐतिहासिक मेले का आयोजन कर लेगी। उन्होंने सरकार पर गलत तरीके से आयोजन करने का आरोप भी लगाया।
जनआस्था बनाम अव्यवस्था
राजिम कुंभ कल्प दशकों से जनआस्था का जीवंत प्रतीक रहा है। लेकिन इस बार मेला अव्यवस्था की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सत्ताधारी दल के अपने ही नेता बार-बार सिस्टम पर सवाल क्यों उठा रहे हैं? जानकारों का मानना है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता से समन्वय की कमी ही इसकी सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है—और शायद इसी कारण विपक्ष को ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ रही।
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