करगिल युद्ध में सशस्त्र बल और आयुध सप्लाई में जबलपुर की अहम भूमिका रही। तीनों सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण लेकर युद्ध के मैदान में सैनिकों ने शौर्य का प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ आयुध निर्माणियां किसी स्तर पर पीछे नहीं रहीं। उनमें दिन-रात उत्पादन हुआ। गोला-बारूद हो या बोफोर्स तोप या फिर सैन्य वाहन, इनकी कमी नहीं होने दी। 25 साल पहले के योगदान को आज भी कर्मचारी और सैनिक नहीं भूलते।
वर्ष 1999 में हुई इस लड़ाई के लिए रेल और सड़क मार्ग से गोला-बारूद सप्लाई होते थे। आयुध निर्माणी खमरिया, वीकल फैक्ट्री जबलपुर , गन कैरिज फैक्ट्री और ग्रे आयरन फाउंड्री (अब ऑर्डनेंस फैक्ट्री जबलपुर) में 24 घंटे उत्पादन होता था। पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि खमरिया में तो कुछ सेक्शन ऐसे थे जहां एक पल भी उत्पादन नहीं रुकता था। कर्मचारी दो से चार दिन तक घर नहीं आते थे। यही हाल दूसरी आयुध निर्माणियों का था।
करगिल युद्ध में सशस्त्र बल और आयुध सप्लाई में जबलपुर की अहम भूमिका रही। तीनों सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण लेकर युद्ध के मैदान में सैनिकों ने शौर्य का प्रदर्शन किया।
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