मध्यप्रदेश सरकार अब गो-नीति लाने की तैयारी में है। (COW shelters)बड़ी बात यह है कि प्रदेश की गोशालाओं के उत्पाद जैसे गोमूत्र से बनी चीजें, गोकाष्ठ, गोबर से बनी खाद व अन्य सामग्री, फिनाइल की तरह उपयोग होने वाला गोनायल आदि सरकार, निगम, मंडल और स्थानीय निकाय खरीदेंगे।यह कदम गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उठाया जा रहा है। गायों का अवैध परिवहन करने वाहनों को राजसात करने, गोशालाओं को बिजली में अनुदान देने, गोशालाओं को प्रति गाय दिया जाने वाला अनुदान बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
1000 गोशालाओं का निर्माण कराया गया
गौरतलब है कि कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक गोवंश की उपेक्षा (COW shelters)को लेकर सरकार को घेरती रही है। बता दें कि कांग्रेस शासनकाल में 1000 गोशालाओं का निर्माण कराया गया था।
वही भाजपा सरकार भी गोवंश के लिए किए गए कार्यों को गिनाती रही है। अब चुनाव पास आने पर सरकार की सक्रियता बढ़ गई है। एक सप्ताह पहले ही भोपाल में गोरक्षा संकल्प सम्मेलन हुआ है। इसमें भी सीएम शिवराज सिंह चौहान ने गोवंश के संरक्षण के लिए कई घोषणाएं की थीं। इसमें यह भी है कि अपर कलेक्टर स्तर का एक अधिकारी जिलों में पदस्थ किया जाएगा जो गोशालाओें का प्रबंधन देखेगा।
प्रदेश में 1762 गोशालाएं
प्रदेश में 1762 गोशालाएं हैं। इनमें 2 लाख 87 हजार गोवंश हैं। राज्य सरकार की तरफ से प्रति गाय हर दिन सिर्फ 20 रुपये गोशालाओं को अनुदान दिया जाता है। गोशाला संचालक लंबे समय समय से गोसेवकों लिए मानदेय की मांग कर रहे हैं। सरकार इन्हें मानदेय देने की जगह हर दिन दिया जाने वाला अनुदान बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
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