बीफार्मा और फार्मेसी संबंधित अन्य कोर्स के छात्रों को प्रायोगिक ज्ञान मिले, इसके लिए उन्हें अस्पताल या फार्मा उद्योग में इंटर्नशिप करनी होगी। मप्र स्टेट फार्मेसी काउंसिल जल्द ही इसका मसौदा फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया और एआइसीटीई को देगी। इससे उन्हें रोजगार मिलने में आसानी होगी।
अभी तक डीफार्मा कोर्स में तीन माह इंटर्नशिप की अनिवार्यता है। इसके बाद ही फार्मेसी काउंसिल द्वारा पंजीयन किया जाता है। इसके अलावा फार्मा इंडस्ट्री छात्रों का ज्ञान अद्यतन करने में भी सहयोग देगी। वह फार्मा छात्रों को रोजगार के साथ प्रशिक्षण दिलवाने में सहयोग करेगी। पिछले कुछ वर्षों में दवा निर्माता कंपनियां तकनीकें और मशीनरी बदल चुकी हैं। ऐसे में छात्रों को इनका अनुभव मिल सके, इसके लिए प्रयास किया जाएगा।
पहली बार फार्मेसी कोर्स के सुधार का कार्य
अभी तक मप्र स्टेट फार्मेसी काउंसिल सिर्फ रजिस्ट्रेशन करती थी। वह पहली बार शिक्षा के सुधार का प्रयास करेगी। इसके संबंध में काउंसिल ने औद्योगिक, शिक्षा और कम्युनिटी व मेडिसिन की तीन तरह की कमेटियां बनाई हैं। उद्योगों से जुड़ी कमेटी में फार्मा क्षेत्र के उद्योगपति, लैब संचालकों सहित नौ लोगों को शामिल किया गया है। यह कमेटी पर 10 अगस्त तक काउंसिल को अपने सुझाव भेजेगी।
फार्मेसी कोर्स के लिए जिन क्षेत्रों में कार्य किया जाना है, उसके लिए गजट में पूर्व में ही प्रकाशन वर्ष 2020 में हो चुका है। अब सिर्फ कमेटियों के सुझाव के बाद उस पर अंतिम निर्णय फार्मेसी लिया जाएगा। इसमें कुछ बिंदुओं को स्टेट फार्मेसी काउंसिल लागू और शेष राष्ट्रीय स्तर के बिदुओं पर फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया से चर्चा कर उस पर अमल किया जाएगा।
स्टेट फार्मेसी काउंसिल ने फार्मा कोर्स में सुधार के लिए 11 शिक्षाविदों की कमेटी बनाई है। इसमें चार शिक्षाविद भोपाल, तीन इंदौर, दो ग्वालियर, एक जबलपुर व एक सागर से है। यह कमेटी सुझाव देगी कि शिक्षा के क्षेत्र में क्या-क्या विकास व बदलाव के कार्य हो सकते हैं। प्रदेश में फार्मेसी की शिक्षा का स्तर राष्ट्रीय स्तर का नहीं है। ऐसे में कमेटी कालेजों में शिक्षा का स्तर सुधार के लिए सुझाव देगी।
कंयुनिटी व मेडिसिन की कमेटी में इंदौर, उज्जैन, रायसेन व सीहोर के नौ लोगों को शामिल किया गया है। इसमें अस्पताल संचालक व दवा विक्रेता भी है। यह कमेटी दवा बिक्री व शासन की नीतियों में परेशानी अन्य मुद्दों पर अपने सुझाव देगी।
पहली बार होंगे बदलाव
मप्र में फार्मेसी कोर्स बेहतर बनाने के लिए पहली बार कुछ बदलाव किए जाना हैं। इसके लागू होने के बाद छात्रों को रोजगार मिलने में सहायता होगी। शासन व निजी फार्मा कंपनियों को प्रशिक्षित फार्मासिस्ट उपलब्ध होंगे। बीफार्मा छात्रों के लिए पहली बार तीन माह की इंटर्नशिप के माडल को लाना चाह रहे हैं। फार्मा कंपनियों और शिक्षाविदों के सुझाव के अधार पर कोर्स में भी परिवर्तन की लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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