आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद परीक्षा के कड़े नियमों को लेकर काफी समय से बहस चल रही है। इस बीच इस मामले की जांच के लिए बनाई गई आईआईटी बॉम्बे की 10 सदस्यीय विशेष जांच समिति ने एक बड़ा सुझाव दिया है। इस कमेटी का कहना है कि अगर कोई छात्र परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़ा भी जाता है तो उसे तुरंत डांटकर परीक्षा हॉल से बाहर करने के बजाय उसका पेपर शांति से पूरा करने दिया जाना चाहिए। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए तैयार किए जा रहे इस नए ड्राफ्ट में छात्रों की मानसिक स्थिति को सबसे आगे रखा गया है। समिति ने मौजूदा कठोर प्रक्रिया को बदलने पर जोर दिया है।
तुरंत सजा की प्रक्रिया नहीं शुरू होगी
नए नियमों के इस ड्राफ्ट के अनुसार अगर कोई छात्र परीक्षा में नकल या किसी अन्य गलत तरीके का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। अभी के नियम के मुताबिक परीक्षा हॉल के अंदर ही छात्र को टोक दिया जाता है और वहीं से सजा की प्रक्रिया शुरू हो जाती है जिससे बच्चे घबरा जाते हैं और भारी तनाव में आ जाते हैं। नया ड्राफ्ट इस तनावपूर्ण माहौल को पूरी तरह से बदलने की बात करता है। छात्र को परीक्षा जारी रखने का मौका देकर मानसिक दबाव कम करने का प्रयास किया गया है।
पहले पक्ष सुना जाएगा फिर फैसला
इस नए ड्राफ्ट में सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि किसी भी तरह की सजा तय करने से पहले आरोपी छात्र का पक्ष सुना जाएगा। छात्र को अपनी बात रखने और सफाई देने का पूरा मौका मिलेगा। जब छात्र अपना पक्ष रख देगा उसके बाद ही अनुशासन समिति मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई फैसला लेगी। जल्दबाजी में एकतरफा सजा देने की जगह अब पूरी प्रक्रिया को आसान और लचीला बनाया जा रहा है ताकि किसी भी छात्र के साथ नाइंसाफी न हो। निष्पक्ष सुनवाई को प्राथमिकता दी गई है।
संवेदनशीलता और काउंसलिंग पर जोर
इस 10 सदस्यीय कमेटी ने केवल परीक्षा नियमों को बदलने की बात नहीं की है बल्कि कई और अहम सुझाव भी दिए हैं। कमेटी ने सिफारिश की है कि कॉलेज के प्रोफेसरों और स्टाफ को छात्रों के साथ संवेदनशीलता से पेश आने की ट्रेनिंग दी जाए ताकि वे मानसिक तनाव के लक्षणों को समय रहते पहचान सकें। इसके साथ ही किसी भी छात्र पर परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगने के बाद उसे तुरंत मानसिक सपोर्ट और काउंसलिंग दी जाएगी ताकि वह किसी भी तरह के आत्मघाती कदम के बारे में न सोचे। कैंपस में बने स्टूडेंट वेलनेस सेंटर को और मजबूत किया जाएगा।
वेलनेस सेंटर और विशेष काउंसलर्स
समिति ने अनुसूचित जाति व जनजाति यानी SC/ST से जुड़े विशेष काउंसलर्स की संख्या बढ़ाने की भी सिफारिश की है ताकि हर छात्र खुलकर अपनी बात कह सके। स्टूडेंट वेलनेस सेंटर को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। परीक्षा नियमों में संवेदनशीलता लाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाला यह ड्राफ्ट छात्रों के हित में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। साहिल वाकोड़े की मृत्यु के बाद उठाए गए इन कदमों से कैंपस में सकारात्मक माहौल बनाने की उम्मीद है। संस्थान प्रशासन इन सिफारिशों पर आगे कार्रवाई कर सकता है।