नई दिल्ली। NCRB 2024 की रिपोर्ट ने देश में बढ़ती हिंसा को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा शिकार 18 से 30 वर्ष के युवा हो रहे हैं, जबकि बच्चों की संख्या भी चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि देश का युवा वर्ग अब सबसे ज्यादा जोखिम में है।
18-30 आयु वर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर
रिपोर्ट के अनुसार 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग हत्या के मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है। वहीं 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की भी बड़ी संख्या इन घटनाओं में शामिल है। आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत में हिंसा का सबसे बड़ा बोझ युवाओं और किशोरों पर पड़ रहा है।
यूपी-बिहार में सबसे ज्यादा मामले
राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे ऊपर हैं।
उत्तर प्रदेश में कुल 1,491 हत्या पीड़ित दर्ज किए गए, जिनमें 1,286 युवा शामिल हैं।
वहीं बिहार में 1,189 मामलों में 1,058 युवा पीड़ित पाए गए।
इसके अलावा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों में भी युवाओं की हत्या के मामले तेजी से सामने आए हैं।
दिल्ली बनी सबसे बड़ा ‘हॉटस्पॉट’
महानगरों की बात करें तो दिल्ली सबसे खतरनाक शहर बनकर सामने आई है। NCRB रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में 219 हत्या पीड़ित दर्ज हुए, जिनमें 176 युवा और 43 बच्चे शामिल हैं। दिल्ली के बाद बेंगलुरु, पटना, सूरत, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों का नाम सूची में शामिल है।
छोटे विवाद बन रहे जानलेवा
रिपोर्ट के विश्लेषण में सामने आया है कि हत्या के ज्यादातर मामले व्यक्तिगत दुश्मनी, पारिवारिक विवाद, संपत्ति झगड़े और प्रेम संबंधों से जुड़े टकराव के कारण हो रहे हैं। यानी अपराध का बड़ा हिस्सा लोगों के करीबी सामाजिक दायरे से ही निकल रहा है।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बेरोजगारी, मानसिक तनाव और सामाजिक रिश्तों में अस्थिरता युवाओं को हिंसा की ओर धकेल रही है। NCRB के आंकड़े इस बात की चेतावनी हैं कि अगर युवा ही सुरक्षित नहीं हैं, तो देश का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है।