मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित अपने आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर करीब पांच दशक तक हिंदी और मराठी सिनेमा का अहम हिस्सा रहे। उन्होंने अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग अंदाज से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। हालांकि, फिल्मों की दुनिया में कदम रखने से पहले उनकी जिंदगी का एक अलग पहलू भी रहा। नाना पाटेकर ने अभिनय के साथ-साथ थिएटर और कला के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत नींव तैयार की थी। उनकी शिक्षा भी कला से जुड़ी रही और उन्होंने मुंबई से कमर्शियल आर्ट की पढ़ाई की थी। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा, फिल्मी सफर और समाजसेवा से जुड़ी खास बातें।
नाना पाटेकर की पढ़ाई-लिखाई कहां से हुई?
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनकी शुरुआती शिक्षा मुंबई के समर्थ विद्यालय से होने की जानकारी मिलती है। इसके बाद उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से कमर्शियल आर्ट की पढ़ाई की। कला की पढ़ाई ने उनके भीतर रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की समझ को मजबूत किया।यही रचनात्मक पृष्ठभूमि आगे चलकर उनके अभिनय और थिएटर के सफर में भी दिखाई दी।फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी।उनका सफर यह बताता है कि अभिनय के क्षेत्र में उनकी दिलचस्पी अचानक नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे कला से जुड़ी उनकी मजबूत पृष्ठभूमि थी।
एक्टिंग और ड्रामा से पहले क्या करते थे नाना पाटेकर?
नाना पाटेकर ने फिल्मों में आने से पहले थिएटर और कला के क्षेत्र में काम किया। उनका फिल्मी करियर 1978 में आई फिल्म 'गमन' से शुरू हुआ। शुरुआती दौर में उन्हें कई तरह के किरदार निभाने का मौका मिला। धीरे-धीरे उनके अभिनय की गंभीरता और संवाद बोलने के अंदाज ने दर्शकों और फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'अब तक छप्पन' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। उन्होंने गंभीर, नकारात्मक, भावुक और कॉमिक- कई तरह के किरदारों में अपनी प्रतिभा दिखाई। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई।
फिल्मी करियर ने दिलाई अलग पहचान
नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा के उन अभिनेताओं में गिना जाता है, जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस बेहद प्रभावशाली रही। 'परिंदा' और 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा।'सलाम बॉम्बे!' के जरिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने 'अग्निसाक्षी', 'अब तक छप्पन', 'वेलकम', 'राजनीति' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी खासियत यह थी कि वह किरदार को केवल संवादों से नहीं, बल्कि अपने हाव-भाव और आवाज के उतार-चढ़ाव से भी जीवंत कर देते थे। उनकी दमदार आवाज और संवाद अदायगी आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। यही वजह है कि नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग और मजबूत जगह बनाई।
2015 में समाजसेवा से जुड़ा नाम फाउंडेशन
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ अभिनेता के तौर पर नहीं थी, बल्कि वह सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने किसानों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए नाम फाउंडेशन (NAAM Foundation) से जुड़कर काम किया। यह संस्था महाराष्ट्र के ग्रामीण और सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों और जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए काम करती रही है।जल संरक्षण, ग्रामीण विकास और पुनर्वास जैसे मुद्दे भी इसके काम का हिस्सा रहे हैं। किसानों की आर्थिक परेशानियों और आत्महत्या के मुद्दे को लेकर भी नाना पाटेकर ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी। उनकी समाजसेवा की खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल सामाजिक मुद्दों की ओर ध्यान खींचने के लिए किया। इसी वजह से फिल्मों के बाहर भी उनकी एक अलग सामाजिक पहचान बनी।
नाना पाटेकर को मिले बड़े सम्मान
नाना पाटेकर को उनके शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले, जो उनके अभिनय की विविधता और प्रभाव का प्रमाण हैं। 'क्रांतिवीर' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।उन्होंने फिल्मफेयर समेत कई अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किए। मराठी सिनेमा में 'नटसम्राट' जैसी फिल्म में उनके अभिनय को भी काफी सराहना मिली।सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनके पुरस्कारों की लंबी सूची इस बात की गवाही देती है कि उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों में अपनी अभिनय क्षमता साबित की।
नाना पाटेकर का निधन, खत्म हुआ एक दौर
8 अक्टूबर 2026 को नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन पर फिल्म जगत और कई प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए। उनका अभिनय, संवाद अदायगी और किरदारों को निभाने का अनोखा अंदाज आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बना रहेगा।नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़े और प्रभावशाली अध्याय का अंत माना जा रहा है।