क्रांतिवीर, सलाम बॉम्बे, खामोशी और वेलकम जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर छा जाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का बृहस्पतिवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। बताया गया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। पाटेकर के आकस्मिक निधन से उनके प्रशंसकों और फिल्म जगत के साथी कलाकारों को गहरा सदमा लगा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों दलों और बॉलीवुड से जुड़े लोगों ने नाना के अचानक चले जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने एक मित्र को तड़के साढ़े तीन बजे तबीयत ठीक नहीं होने का संदेश भेजा। इसके बाद उन्हें एक अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में लगातार 45 मिनट तक सीपीआर दिए जाने के बावजूद पाटेकर होश में नहीं आए और सुबह करीब पांच बजकर 10 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पाटेकर के परिवार में उनकी पत्नी और बेटा मल्हार हैं।
छोटे किरदार से बहुमुखी अभिनेता तक
अपने दमदार अभिनय और संवाद की खास शैली के लिए पहचाने जाने वाले पाटेकर ने छोटे-छोटे किरदारों से फिल्मी सफर की शुरुआत की और आगे चलकर अपने दौर के सबसे बहुमुखी प्रतिभा वाले अभिनेताओं में शुमार हुए। उनका जन्म रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम विश्वनाथ पाटेकर था। वह अक्सर अपने अभिनय कौशल को निखारने के लिए प्रोत्साहित करने का श्रेय अपने पिता को देते थे। पाटेकर हिंदी और मराठी की कई फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जाने जाते रहे। उनकी चर्चित हिंदी फिल्मों में परिंदा प्रहार द फाइनल अटैक तिरंगा खामोशी द म्यूजिकल शामिल हैं। पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार कई फिल्मफेयर पुरस्कार महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मराठी से सम्मानित किया गया था। उन्हें देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री भी प्रदान किया गया था।
सामाजिक सेवा और किसानों के लिए काम
नाना ने महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में आत्महत्या करने वाले करीब 500 किसानों की विधवाओं को आरोग्य कार्ड उपलब्ध कराने की पहल की थी। इससे वे छत्रपति संभाजीनगर के महात्मा गांधी अस्पताल में मुफ्त चिकित्सा उपचार करा सकीं। पाटेकर ने सूखाग्रस्त मराठवाड़ा क्षेत्र में काम किया था और 2016 में मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर स्थापित नाम फाउंडेशन के जरिए किसानों के परिवारों को सहायता पहुंचाई थी। उनकी सामाजिक संवेदना कलाकार से आगे जाकर समाजसेवी की भूमिका में दिखाई दी। किसानों के परिवारों की मदद उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
कारगिल युद्ध में सैन्य सेवा
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर को कुछ समय के लिए विराम देकर युद्ध के मोर्चे पर भारतीय सेना के साथ जाने की अनुमति मांगी थी। अभिनेता ने वर्षों बाद कौन बनेगा करोड़पति में अपनी जिंदगी के इस अध्याय को याद किया था। पाटेकर ने 1991 में आई फिल्म प्रहार द फाइनल अटैक के लिए सशस्त्र बलों के साथ कठोर प्रशिक्षण लिया था। कारगिल संघर्ष शुरू होने के बाद पाटेकर ने सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से सैनिकों के साथ मोर्चे पर जाने का अनुरोध किया लेकिन अनुमति नहीं मिली। फिर उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से बात की। उसके बाद अगस्त 1999 में कारगिल युद्ध क्षेत्र में पहुंचे जहां वह 60 दिन सैनिकों के साथ रहे। वह द्रास लेह कुपवाड़ा बारामूला तथा सोपोर समेत कई स्थानों पर गए। वह बाद में एक त्वरित प्रतिक्रिया दल का हिस्सा बने और फिर श्रीनगर के एक सैन्य अस्पताल में भी मदद की।
पुरस्कार सम्मान और विवाद
पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित अनेक सम्मान मिले। वर्ष 2018 में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने पाटेकर पर फिल्म के सेट पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस आरोप के बाद भारत में मीटू आंदोलन की शुरुआत हुई। अभिनेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी हालांकि उन्होंने लगातार इन आरोपों से इनकार किया। बाद में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण मामला बंद कर दिया गया। इस बीच तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए एक वीडियो में कहा कि उन्हें पाटेकर के निधन की खबर मिली है लेकिन वह पहले यह तय करेंगी कि उन्हें किस तरह की प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह लखनऊ में एक कार्यक्रम के लिए जा रही हैं और फिलहाल उसी पर ध्यान देना चाहती हैं। नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक युग के अंत जैसा है। उनके अभिनय और राष्ट्र सेवा दोनों को हमेशा याद रखा जाएगा।