बांग्लादेश: बांग्लादेश में इलीश मछली की कमी के बीच मछुआरों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। एक ओर समुद्र में पर्याप्त इलीश नहीं मिल रही है, तो दूसरी ओर सरकार की ओर से 22 दिनों तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। इसका असर मछुआरों की आजीविका के साथ-साथ बाजार में मछली की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। बरिशाल के थोक बाजार में पिछले एक सप्ताह के दौरान इलीश की कीमत प्रति किलो 250 से 300 टका तक बढ़ गई है। मछुआरों को उम्मीद थी कि प्रतिबंध लागू होने से पहले वे अधिक मछली पकड़कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकेंगे, लेकिन कम उत्पादन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब मछुआरों के सामने परिवार का खर्च चलाने और पुराने कर्ज चुकाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच, सरकार ने प्रतिबंध की अवधि में तटीय क्षेत्रों के मछुआरों को खाद्य सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
8 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक इलीश पकड़ने पर प्रतिबंध
बांग्लादेश में इलीश मछली के प्रजनन और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 8 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2026 तक 22 दिनों का प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में पूरे देश में इलीश मछली पकड़ने पर रोक रहेगी। इसके अलावा, इलीश की खरीद-बिक्री, परिवहन, भंडारण और बाजार में बिक्री भी प्रतिबंधित रहेगी। सरकार का उद्देश्य प्रजनन के महत्वपूर्ण समय में मछलियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और भविष्य में उनके उत्पादन को बढ़ावा देना है। हाल ही में ‘मां इलीश संरक्षण अभियान 2026’ को लागू करने के लिए आयोजित राष्ट्रीय टास्क फोर्स समिति की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। प्रतिबंध के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन और मत्स्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, इस फैसले से उन मछुआरों की चिंता बढ़ गई है, जिनकी रोजी-रोटी मुख्य रूप से इलीश पकड़ने पर निर्भर है।
समुद्र में इलीश की उपलब्धता में बड़ी गिरावट
बांग्लादेश में इस साल समुद्र में इलीश की उपलब्धता में गिरावट दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जुलाई से अक्टूबर के दौरान समुद्र में 33,934 मीट्रिक टन इलीश मिली थी। वहीं, इस साल इसी अवधि में यह मात्रा घटकर 24,079 मीट्रिक टन रह गई है। इन आंकड़ों से दोनों अवधियों के बीच लगभग 9,855 मीट्रिक टन की कमी सामने आती है। इलीश की उपलब्धता घटने से मछुआरों की कमाई प्रभावित हुई है और थोक बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान इलीश के उत्पादन में भी गिरावट आई है। हालांकि, उत्पादन में कमी के पीछे अलग-अलग पर्यावरणीय और प्राकृतिक कारणों की भूमिका का आकलन करना जरूरी है। लगातार घटती उपलब्धता ने मछली उद्योग से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
एक सप्ताह में 250 से 300 टका तक बढ़े दाम
इलीश की आपूर्ति में कमी का सीधा असर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है। बांग्लादेश के बरिशाल स्थित थोक बाजार में पिछले एक सप्ताह के भीतर इलीश की कीमत प्रति किलो 250 से 300 टका तक बढ़ गई है। बाजार में पर्याप्त मात्रा में मछली नहीं पहुंचने के कारण कारोबारियों को भी आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी से आम खरीदारों के लिए इलीश खरीदना महंगा हो गया है। मछली की उपलब्धता कम होने और 22 दिनों के प्रतिबंध की शुरुआत ने बाजार की स्थिति को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रतिबंध के दौरान इलीश की खरीद-बिक्री और परिवहन पर रोक रहने से इसके सामान्य कारोबार पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।
मछुआरों पर बढ़ा कर्ज का बोझ, 100 किलो चावल देने की मांग
इलीश की कमी के कारण मछुआरों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। मछुआरों को उम्मीद थी कि प्रतिबंध लागू होने से पहले अच्छी मात्रा में मछली पकड़कर वे अपनी कमाई बढ़ा सकेंगे और पुराने कर्ज चुका पाएंगे। लेकिन समुद्र में पर्याप्त मछली नहीं मिलने से उनकी आय प्रभावित हुई है। बरिशाल विभागीय लघु मत्स्यजीवी समिति के अध्यक्ष इजराइल पंडित के मुताबिक, मछली नहीं मिलने के कारण मछुआरों का कर्ज और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान प्रत्येक मछुआरा परिवार को 100 किलो चावल उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि मछली पकड़ने का काम बंद रहने के दौरान परिवारों के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में मछुआरों को आर्थिक और खाद्य सहायता उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
सरकार ने तटीय मछुआरों को खाद्य सहायता देने का दिया भरोसा
मछुआरों की समस्याओं को देखते हुए बांग्लादेश सरकार की ओर से राहत उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। इसी सप्ताह चटगांव के सर्किट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रतिबंध की अवधि में मछुआरों की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। सरकार की ओर से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा परिवारों के बीच खाद्य सामग्री वितरित करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य मछली पकड़ने का काम बंद रहने के दौरान परिवारों को भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करना है। हालांकि, मछुआरा संगठनों की ओर से प्रत्येक परिवार को 100 किलो चावल देने की मांग भी उठाई गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार की ओर से किस तरह की सहायता और कितनी मात्रा में राहत उपलब्ध कराई जाती है। मछुआरों को उम्मीद है कि सरकारी मदद से प्रतिबंध के दौरान उनके परिवारों को कुछ राहत मिल सकेगी।
नदियों में प्रदूषण और गहराई कम होना भी चिंता का विषय
मत्स्य वैज्ञानिकों के अनुसार, बांग्लादेश में इलीश की उपलब्धता प्रभावित होने के पीछे नदियों की बदलती स्थिति भी एक संभावित कारण है। नदियों में प्रदूषण बढ़ने और उनकी गहराई तथा नौवहन क्षमता कम होने से मछलियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इलीश गहरे पानी में रहने वाली मछली है और उसके आवागमन के लिए अनुकूल जलीय परिस्थितियां महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। नदियों और समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव का असर मछलियों के प्रजनन और उपलब्धता पर पड़ सकता है। हालांकि, उत्पादन में गिरावट के सभी कारणों की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। विशेषज्ञों की राय में जलीय पर्यावरण का संरक्षण मत्स्य संसाधनों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में इलीश के संरक्षण के साथ-साथ नदियों के प्रदूषण और जलमार्गों की स्थिति पर ध्यान देना भी जरूरी होगा।
संरक्षण अभियान और मछुआरों की आजीविका के बीच संतुलन जरूरी
बांग्लादेश में इलीश मछली पर लगाया गया 22 दिनों का प्रतिबंध उसके प्रजनन और संरक्षण के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इससे उन हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है, जो मछली पकड़ने और उससे जुड़े कारोबार पर निर्भर हैं। पहले से ही कम उपलब्धता, बढ़ती कीमतें और कर्ज का दबाव मछुआरों की परेशानियों को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में प्रतिबंध के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता देना भी जरूरी होगा। सरकार की ओर से खाद्य सामग्री वितरित करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन मछुआरों की मांग है कि राहत उनकी जरूरतों के अनुरूप हो। दूसरी ओर, इलीश के प्रजनन और उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षण संबंधी उपायों का पालन करना भी आवश्यक है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रतिबंध के बाद इलीश की उपलब्धता में कितना सुधार होता है और सरकारी सहायता से मछुआरों को कितनी राहत मिलती है।