दक्षिण कोरिया के पॉप कल्चर ने पिछले एक दशक में दुनिया भर में अपने तीव्र प्रभाव से एक वैश्विक लहर उत्पन्न की है, जिसे हल्ल्यु कहा जाता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह लहर दक्षिण एशिया या पश्चिमी देशों से ज्यादा मुस्लिम बहुल देशों में देखने को मिल रही है। यूएई में कोरियन कल्चर के प्रति सकारात्मक राय 94.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो इस वैश्विक सर्वे में शीर्ष स्थान है। मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया भी इस सूची में बहुत ऊपर हैं, जो साबित करता है कि कोरिया के प्रति आकर्षण महज मनोरंजन तक सीमित नहीं बल्कि एक गहरा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव बनकर उभर रहा है।
मुस्लिम देशों में कोरियन पॉप कल्चर की स्वीकार्यता के मूल कारण
मुस्लिम देशों में के-पॉप और के-ड्रामा का प्रभाव बढ़ने के पीछे कई सांस्कृतिक और सामाजिक कारक समाहित हैं। के-ड्रामा की स्टोरीटेलिंग में भावनात्मक संवेदनशीलता, पारिवारिक मूल्यों, रिश्तों की पवित्रता और साफ-सुथरी प्रस्तुति ऐसे तत्व हैं जो मुस्लिम समाज की सांस्कृतिक संरचना से मेल खाते हैं। इसके अलावा के-पॉप सितारों की अनुशासित जीवनशैली, फैशन सौंदर्य और मेहनत भरी छवि युवाओं के लिए प्रेरक बनती है। इन देशों के दर्शक कोरियन लाइफस्टाइल में जिस सादगी, अनुशासन और आधुनिकता का संयोजन देखते हैं, वह उनकी सांस्कृतिक मानसिकता के साथ सहज रूप से जुड़ जाता है।
मनोरंजन से परे, जीवनशैली और सोच पर कोरियन प्रभाव
के-ड्रामा और के-पॉप का प्रभाव केवल टीवी स्क्रीनों तक सीमित नहीं रहा बल्कि युवाओं की दैनिक जीवनशैली, फैशन, भोजन की आदतों और सामाजिक रिश्तों की समझ पर भी भारी असर छोड़ रहा है। कोरियन भोजन जैसे रामेन और किम्बाप, कोरियन स्किनकेयर रूटीन और परिधान अब मुस्लिम देशों के शहरी युवाओं की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। कई युवा कोरियन भाषा सीखने में भी रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि उन्हें दक्षिण कोरिया की संस्कृति और अवसरों से गहरा लगाव महसूस होता है। यह आकर्षण उन्हें ग्लोबल संवाद और सांस्कृतिक साझेदारी के नए रास्ते भी दिखा रहा है।
राजनयिक संबंध और सांस्कृतिक कूटनीति की बड़ी भूमिका
दक्षिण कोरियाई सरकार पिछले कई वर्षों से सांस्कृतिक कूटनीति को अपनी रणनीति का प्रमुख हिस्सा बना चुकी है। 2018 से किए जाने वाले सर्वे के अनुसार 2025 में 82.3 प्रतिशत लोगों ने कोरिया के प्रति सकारात्मक राय व्यक्त की, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। यूएई, मिस्र, तुर्की और इंडोनेशिया के साथ कोरिया के मजबूत व्यापारिक, तकनीकी और पर्यटन संबंधों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और बढ़ाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और OTT ने इस कनेक्शन को कई गुना अधिक आसान और तेज बना दिया है। इस मजबूत राजनयिक आधार ने कोरियन कल्चर को इन देशों के युवाओं के बीच एक स्थायी आकर्षण बना दिया है।
भारत बनाम मुस्लिम देश: कोरियन क्रेज में अंतर क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि भारत में भी के-पॉप और के-ड्रामा का क्रेज अत्यधिक है, लेकिन मुस्लिम देशों में यह इससे भी कहीं अधिक प्रभावशाली रूप में दिखाई देता है। भारत में सांस्कृतिक विविधता, मनोरंजन के अनेक विकल्प और घरेलू फ़िल्म उद्योग की शक्ति के कारण कोरियन कल्चर का प्रभाव बंट जाता है। वहीं मुस्लिम देशों में कोरियन कल्चर को क्लासिक और मॉडर्न दोनों रूपों में एक संतुलित मनोरंजन का विकल्प माना जाता है। कुछ देशों में सामाजिक प्रतिबंधों और मनोरंजन के सीमित विकल्पों के चलते लोग के-ड्रामा की भावनात्मक, सरल और नैतिक कथाओं से अधिक जुड़ते हैं, जिससे यह उनकी प्राथमिक पसंद बन चुका है।
कोरियन कल्चर: आधुनिकता, नैतिकता और सौंदर्य का अनोखा मिश्रण
कोरियन कल्चर की लोकप्रियता का मूल कारण इसका संतुलित चरित्र है, जिसमें आधुनिक आकर्षण के साथ पारंपरिक मूल्यों की सहज उपस्थिति मिलती है। यह मिश्रण उन समाजों में गहरी पकड़ बनाता है, जहां संस्कृति, नैतिकता और परिवार की अहमियत सबसे अधिक मानी जाती है। यही कारण है कि कोरियन वेव धीरे-धीरे एक वैश्विक सांस्कृतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है और मुस्लिम देशों में इसका प्रसार एक नई वैश्विक पहचान को परिभाषित कर रहा है।
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