नई दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच ओमान के समुद्र तट से एक बेहद हैरान और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी के बीच, अमेरिकी सेना ने एक वाणिज्यिक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला कर दिया है। इस जहाज पर कुल 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से 3 नाविक हमले के बाद से लापता हैं। इस घटना ने नई दिल्ली से लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) तक हड़कंप मचा दिया है और भारत ने अमेरिका के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है।
धू-धू कर जला जहाज, ऑडियो में आई चीख-पुकार: "सर, हमें बचाइए"
बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के अनुसार, पलाउ के झंडे वाले 'सेत्तेबेल्लो' (Settebello) नामक इस तेल टैंकर पर आरोप था कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी को दरकिनार कर ईरान के बंदरगाह में घुसने की कोशिश कर रहा था। ओमान तट के पास पहुंचते ही अमेरिकी नौसेना ने इस पर गाइडिट मिसाइल दाग दी।
मिसाइल लगते ही पूरे जहाज में भीषण आग लग गई और वह धीरे-धीरे समुद्र में डूबने लगा। जहाज पर मौजूद कुल 28 क्रू मेंबर्स में से 24 भारतीय थे। हमले के तुरंत बाद नाविकों ने मुंबई स्थित 'मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर' को आपातकालीन संकट संदेश (SOS) भेजा। सामने आए एक दर्दनाक ऑडियो में भारतीय नाविक को रोते हुए कहते सुना गया, "सर हमारी मदद कीजिए, आग लग गई है और जहाज डूब रहा है।"
मुंबई सेंटर ने बिना वक्त गंवाए ओमान के मैरीटाइम सर्च एंड रेस्क्यू सेंटर (OMSC) से संपर्क किया। दोनों देशों की नौसेनाओं ने युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, लेकिन 3 भारतीय अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।
भारत ने अमेरिका को साउथ ब्लॉक में किया तलब, थमाया 'डेमार्श'
इस घटना के कुछ ही घंटों के भीतर विदेश मंत्रालय ने कड़ा एक्शन लिया। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने भारत में अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत (Charge d'Affaires) जसन मीक्स (Jason Meeks) को साउथ ब्लॉक तलब किया। भारत ने इस सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़े शब्दों में औपचारिक राजनयिक विरोध यानी 'डेमार्श' (Demarche) जारी किया और लापता भारतीयों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
राजनयिक समीकरणों की परीक्षा: यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्ती के बीच दोनों देशों के व्यापारिक टैरिफ विवाद सुलझ रहे थे। लेकिन अमेरिकी हमले में भारतीय नागरिकों के हताहत होने से भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया तनाव आ गया है।
संयुक्त राष्ट्र (UNSC) में भारत की दहाड़: "हमारे नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि"
इस हमले के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की खुली बहस में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों के खिलाफ भारत की मजबूत और स्पष्ट आवाज बुलंद की।
उन्होंने वैश्विक मंच पर कहा:भारतीय कार्यबल पर खतरा: वैश्विक शिपिंग और व्यापारिक जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इस क्षेत्र में हो रहे हमलों के कारण कई भारतीय नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है और कई लापता हैं, जिसे भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
10 मिलियन भारतीयों का सवाल: खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में लगभग 1 करोड़ (10 मिलियन) भारतीय नागरिक रहते और कमाते हैं। उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अर्थव्यवस्था पर चोट: होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से भारत की ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply Chain) और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत ने सभी पक्षों से तुरंत सैन्य हमले रोकने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील की।
गाजा और लेबनान पर भारत का बड़ा रुख: UNRWA को देगा फंड
सुरक्षा परिषद में बोलते हुए राजदूत पर्वथनेनी ने गाजा की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए तत्काल सीजफायर (युद्धविराम) और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' के जरिए फिलिस्तीन को संप्रभु देश बनाने की वकालत की। उन्होंने एलान किया कि भारत अगले कुछ दिनों में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संस्था UNRWA को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त सौंपेगा (जो कि भारत के सालाना 5 मिलियन डॉलर के योगदान का हिस्सा है)।
इसके साथ ही लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UNIFIL), जिसमें भारतीय सैनिक भी शामिल हैं, पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए भारत ने कहा कि पीसकीपर्स को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत जल्द ही लेबनान को चिकित्सा सहायता भी भेजेगा।
अंत में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि 80 साल पुरानी और पुरानी हो चुकी सुरक्षा परिषद की वास्तुकला (Outdated Architecture) के कारण ही यूएन आज के दौर के युद्धों को रोकने में नाकाम हो रहा है। भारत ने समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुसार सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में तत्काल सुधार (UNSC Reforms) की मांग की।