सूर्य पर इन दिनों असाधारण स्तर की हलचल देखी जा रही है, जिसने वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष एजेंसियों और वैश्विक संचार नेटवर्क को सतर्क कर दिया है। फरवरी 2026 के शुरुआती सप्ताह में सूर्य की सतह से कई रिकॉर्ड श्रेणी की सौर ज्वालाएं फूटीं, जिनका प्रभाव पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण पर प्रत्यक्ष रूप से महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ती गतिविधि सौर चक्र 25 के चरम चरण, जिसे सोलर मैक्सिमम कहा जाता है, के बेहद करीब पहुंचने का संकेत है। जैसे-जैसे सूर्य अपने सक्रिय चरण में प्रवेश करता है, रेडियो संचार, जीपीएस नेविगेशन और उपग्रह-आधारित सेवाओं पर जोखिम बढ़ता जाता है।
उच्च तीव्रता की लगातार ज्वालाए, वैज्ञानिकों में बढ़ी चिंता
एक फरवरी के बाद से सूर्य ने कई शक्तिशाली एक्स-क्लास फ्लेयर उगले, जिनमें एक्स8.3, एक्स8.1, एक्स4.2 और एक्स1.5 श्रेणी की ज्वालाएं विशेष रूप से उल्लेखनीय रहीं। एक्स-क्लास फ्लेयर सूर्य द्वारा उत्सर्जित सबसे प्रबल सौर विस्फोट माने जाते हैं और ये पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। इन ज्वालाओं से आयनमंडल में अस्थिरता पैदा होने लगती है, जिससे रेडियो संचार और जीपीएस सिग्नल की गुणवत्ता कमजोर हो सकती है। यही कारण है कि दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां और अनुसंधान केंद्र लगातार इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
एआर4366 सनस्पॉट—सौर विस्फोटों का केंद्र
सौर सतह पर मौजूद एआर4366 सनस्पॉट समूह इस असामान्य गतिविधि का प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। दो फरवरी को इसी क्षेत्र से एक्स8.3 और एक्स8.1 श्रेणी के शक्तिशाली फ्लेयर निकले, जिन्हें अक्टूबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी घटनाओं में गिना गया है। इस सनस्पॉट क्षेत्र में चुंबकीय ऊर्जा का तीव्र संचय और अस्थिरता दर्शाती है कि आने वाले दिनों में और बड़े सौर विस्फोट उत्पन्न हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि सनस्पॉट के इस स्तर पर सक्रिय होने का अर्थ है कि सोलर मैक्सिमम और भी उग्र रूप ले सकता है।
चार दिनों तक जारी रहा विशाल फ्लेयर्स का सिलसिला
तीन फरवरी को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर एक्स1.5 श्रेणी का फ्लेयर दर्ज हुआ। इसके अगले दिन यानी चार फरवरी को सुबह 7 बजकर 13 मिनट पर फिर एक्स1.5 श्रेणी की ज्वाला देखी गई। इसी दिन कुछ घंटे बाद एक्स4.2 श्रेणी की तेज ज्वाला भी रिकॉर्ड की गई। लगातार चार दिनों तक इस तरह के शक्तिशाली फ्लेयर्स का निकलना अंतरिक्ष मौसम की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण घटना है, जिसने उपग्रहों और पृथ्वी-आधारित संचार प्रणालियों के लिए संभावित जोखिम बढ़ा दिए हैं।
इसरो और नासा ने बढ़ाई निगरानी, उपग्रहों पर खास सतर्कता
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे तेज सौर फ्लेयर उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को प्रभावित कर सकते हैं, सिग्नल ट्रांसमिशन में बाधा डाल सकते हैं और आवश्यक होने पर उपग्रहों को सुरक्षित मोड में शिफ्ट करना पड़ सकता है। अंतरिक्ष मौसम अलर्ट सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं ताकि किसी भी संभावित भू-चुंबकीय तूफान से पहले आवश्यक सतर्कताएँ अपनाई जा सकें।
सूर्य की रिकॉर्ड चमक को उपकरणों ने सहेजा, अध्ययन जारी
सोलर डायनेमिक्स ऑब्जर्वेटरी (SDO) ने इन सौर घटनाओं को 131 और 193 एंगस्ट्रॉम तरंगदैर्घ्य पर विशेष इमेजिंग के माध्यम से कैद किया। तस्वीरों में सूर्य की सतह पर नीली और लाल रंग की प्रचंड चमक दिखाई दी, जो उच्च ऊर्जा उत्सर्जन का संकेत है। वैज्ञानिक वर्तमान डेटा से ऊर्जा स्तर, चुंबकीय संरचना और संभावित भू-चुंबकीय प्रभावों का विश्लेषण कर रहे हैं। अनुमान है कि आने वाले कुछ सप्ताहों तक सूर्य इसी प्रकार अत्यधिक सक्रिय रह सकता है।
Comments (0)