वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रम्प प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी सुरक्षा प्राथमिकता सूची में लैटिन अमेरिका बड़े स्तर पर शामिल है। ट्रम्प ने कहा कि यदि क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति और कथित आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगी, तो अमेरिका “बूट्स ऑन द ग्राउंड” यानी प्रत्यक्ष सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा सकता है। यह संकेत पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।
क्यूबा—“असफल राष्ट्र” करार
क्यूबा पर ट्रम्प ने बेहद कठोर रुख अपनाते हुए उसे “असफल राष्ट्र” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्यूबा के नागरिकों की सहायता करना चाहता है, जैसे वह वेनेजुएला में कर रहा है। साथ ही उन्होंने उन लोगों का भी ज़िक्र किया जिन्हें क्यूबा छोड़कर अमेरिका में बसना पड़ा। ट्रम्प का यह बयान दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है।
कोलंबिया को खुली चेतावनी
कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो पर सीधा हमला बोलते हुए ट्रम्प ने आरोप लगाया कि वहां “बड़े कोकीन नेटवर्क” संचालित हो रहे हैं, जिनका असर अमेरिकी समाज तक पहुँच रहा है। उन्होंने पेट्रो को सावधान रहने की नसीहत देते हुए कहा कि यदि हालात नहीं बदले, तो अमेरिका कड़ा कदम उठा सकता है। यह बयान क्षेत्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकता है।
मेक्सिको—ड्रग कार्टेल्स पर बड़ा आरोप
मेक्सिको के संदर्भ में ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबाम अपने देश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर पा रही हैं। ट्रम्प ने दावा किया कि ड्रग कार्टेल्स ही असल में देश चला रहे हैं और उन्होंने कई बार मेक्सिको को सैन्य सहायता की पेशकश की, जिसे नकार दिया गया। यह बयान दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया—राजनयिक हलचल तेज
मेक्सिको, क्यूबा और कोलंबिया ने अमेरिकी कार्रवाई और बयानों की कड़ी निंदा की है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज़-कैनेल ने हमले को “कायरतापूर्ण” बताया, जबकि मेक्सिको ने पूरे लैटिन अमेरिका को “शांति का क्षेत्र” घोषित करते हुए सैन्य दखल पर चिंता जताई। वहीं अमेरिका के भीतर भी कई सांसदों ने ट्रम्प के कदम पर सवाल उठाए हैं और इसे अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है।
विश्व राजनीति पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लैटिन अमेरिका में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक रणनीतिक समीकरणों पर पड़ेगा। नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई के नाम पर उठाए गए कदम क्षेत्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिए से भी बहस का विषय बन सकते हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर व्यापक वैश्विक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
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