तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने सोमवार को ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर हमला किया। यह घटनाक्रम अमेरिका में मंगलवार को होने वाली मिडटर्म इलेक्शन की वोटिंग से कुछ घंटे पहले सामने आया है। इस बीच ईरान के केश्म द्वीप पर कम से कम पांच जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
केश्म द्वीप पर पांच धमाकों से मचा हड़कंप
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, सोमवार को केश्म द्वीप पर लगातार पांच धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। इसके अलावा दक्षिणी ईरान के बंदर लेंगेह शहर के आसपास भी विस्फोट की खबर सामने आई।
ईरान का दावा- दो अमेरिकी जासूसी ड्रोन मार गिराए
इस घटनाक्रम के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो अमेरिकी MQM-170 ड्रोन मार गिराए हैं।ईरानी मीडिया के मुताबिक, इन ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम की मदद से निशाना बनाया गया। ईरान का दावा है कि इस कार्रवाई से अमेरिकी ड्रोन अपना मिशन पूरा नहीं कर सके।
अमेरिका के निशाने पर क्यों है केश्म द्वीप?
केश्म द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। यह होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में शामिल है। इस द्वीप की रणनीतिक स्थिति के कारण इसका सैन्य और आर्थिक महत्व काफी ज्यादा है।केश्म द्वीप को अमेरिका के लिए अहम रणनीतिक चिंता का विषय माना जाता है। इसकी प्रमुख वजहें हैं
1. अंडरग्राउंड सैन्य नेटवर्क: रिपोर्ट्स के मुताबिक, द्वीप के नीचे सुरंगों और भूमिगत ठिकानों का नेटवर्क मौजूद है। यहां ईरान ने सैन्य संसाधनों और तटीय सुरक्षा से जुड़े इंतजाम किए हैं।
2. समुद्री रास्तों पर नियंत्रण: केश्म द्वीप होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है। इस वजह से यहां मौजूद सैन्य ठिकानों की मदद से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
3. तेल सप्लाई के लिए अहम: होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते पर किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन से पहले सैन्य कार्रवाई
केश्म द्वीप पर हमले की खबर ऐसे समय आई है, जब अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म इलेक्शन के लिए मतदान होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे पहले ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावना को लेकर नरम रुख दिखाया था।ट्रम्प ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि ईरान के साथ समझौते की संभावना भी मौजूद है। इस घटनाक्रम ने अमेरिकी चुनाव से ठीक पहले अमेरिका-ईरान तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ सकता है तनाव
केश्म द्वीप के पास हुए धमाकों और अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।इस रास्ते पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही, कच्चे तेल की सप्लाई और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच आगे होने वाली सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।