न्यूयार्क. अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर के मुख्य क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से लगभग 3.4 डिग्री सेल्सियस से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे सुपर-डुपर अल नीनो नाम दिया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपने मासिक जलवायु बुलेटिन में कहा है कि इस वर्ष का अल नीनो दिसंबर में चरम पर पहुंचने से पहले और तीव्र होगा और लगभग 100 प्रतिशत निश्चित है कि यह फरवरी 2027 तक जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस दौरान समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड तोड़ सकता है। इसे पूरी दुनिया के लिए खतरा माना जा रहा है क्योंकि इससे सर्दियों में कम ठंड और गर्मियों में भीषण गर्मी की आशंका है।
समुद्र की सतह का तापमान कितना बढ़ेगा
विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने बुलेटिन के साथ जारी एक बयान में कहा कि डब्ल्यूएमओ के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100 प्रतिशत संभावना है जो संभवतः कम से कम 1950 के बाद से सबसे मजबूत अल नीनो में से एक होगा। संयुक्त राष्ट्र की मौसम संबंधी संस्था ने कहा कि मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में जो अल नीनो घटना का केंद्र है समुद्र की सतह का तापमान अक्टूबर से दिसंबर तक सामान्य से रिकॉर्ड 3.7 डिग्री सेल्सियस यानी 6.7 डिग्री फारेनहाइट अधिक तक पहुंचने की उम्मीद है।
वैश्विक प्रभाव और खतरे
इस सुपर अल नीनो से सर्दियों में सामान्य से कम ठंड और गर्मियों में अत्यधिक गर्मी की आशंका बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह का यह असामान्य तापमान वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। वर्षा के पैटर्न में बदलाव सूखे या बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। कृषि जल संसाधन और ऊर्जा क्षेत्रों पर इसका असर पड़ने की संभावना है। डब्ल्यूएमओ ने देशों से सतर्कता बरतने और तैयारी बढ़ाने की अपील की है।
1950 के बाद सबसे मजबूत अल नीनो
डब्ल्यूएमओ के पूर्वानुमान के अनुसार यह अल नीनो 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक साबित हो सकता है। फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग पूर्ण संभावना जताई गई है। दिसंबर में चरम पर पहुंचने के बाद भी इसका प्रभाव कई महीनों तक बना रह सकता है। जलवायु वैज्ञानिक लगातार निगरानी कर रहे हैं और अपडेट जारी कर रहे हैं। समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से वैश्विक तापमान में भी वृद्धि हो सकती है।
तैयारी और सतर्कता जरूरी
इस अलर्ट के बाद देशों को मौसम संबंधी आपदाओं के लिए तैयार रहना होगा। कृषि योजनाओं जल प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है। डब्ल्यूएमओ के बुलेटिन ने वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के साथ अल नीनो का यह स्वरूप और अधिक तीव्र हो सकता है। सामान्य से 3.7 डिग्री तक तापमान बढ़ना असामान्य है और इसके प्रभावों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। मौसम विभाग और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।