घर की रसोई में एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है। हल्के, सस्ते और जल्दी गर्म होने की वजह से ये आम लोगों की पसंद बने रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इनके उपयोग को लेकर कई तरह की आशंकाएँ सामने आई हैं। आम धारणा यह बन गई है कि एल्युमिनियम के बर्तनों में बना भोजन लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। कई लोग इसे मस्तिष्क को नुकसान पहुँचाने, किडनी रोग बढ़ाने और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जोड़कर देखते हैं। इसी कारण अनेक परिवारों में इन बर्तनों के उपयोग को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
धातु की रासायनिक प्रकृति और सुरक्षा परत
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो एल्युमिनियम एक प्रतिक्रियाशील धातु है। लेकिन जब यह हवा के संपर्क में आता है तो इसकी सतह पर एल्युमिनियम ऑक्साइड की एक अत्यंत पतली परत बन जाती है। यह परत एक सुरक्षात्मक कवच की तरह काम करती है और धातु को सीधे भोजन के संपर्क में आने से काफी हद तक रोकती है। यही कारण है कि सामान्य परिस्थितियों में भोजन में एल्युमिनियम की मात्रा बहुत सीमित रहती है। यह प्राकृतिक सुरक्षा परत धातु को स्थिर बनाए रखती है और रासायनिक प्रतिक्रिया की संभावना को कम कर देती है।
भोजन में एल्युमिनियम की मात्रा कितनी होती है
यह सही है कि कुछ परिस्थितियों में भोजन में एल्युमिनियम की थोड़ी मात्रा मिल सकती है। खासकर तब जब खट्टी चीजें जैसे टमाटर, इमली या नींबू वाले व्यंजन एल्युमिनियम के बर्तनों में पकाए जाएँ या फिर बर्तन पर गहरी खरोंचें पड़ गई हों। फिर भी चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य उपयोग में भोजन में मिलने वाली एल्युमिनियम की मात्रा बहुत कम होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति सप्ताह शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम पर दो मिलीग्राम तक एल्युमिनियम का सेवन सुरक्षित माना जाता है, जबकि भोजन के माध्यम से शरीर में पहुँचने वाली मात्रा आमतौर पर इस सीमा से काफी कम रहती है।
कैंसर और अल्जाइमर से संबंध का सच
एल्युमिनियम के बर्तनों को लेकर सबसे बड़ी चिंता कैंसर और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ी हुई है। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों में अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि एल्युमिनियम के बर्तनों में बना भोजन सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसी तरह बड़े पैमाने पर किए गए मानव अध्ययनों में भी अल्जाइमर रोग के साथ इसका स्पष्ट संबंध स्थापित नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों के पीछे कई जटिल कारण होते हैं और एल्युमिनियम के बर्तनों को सीधे इसके लिए जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं है।
शरीर एल्युमिनियम को कैसे बाहर निकालता है
मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऐसे तंत्र मौजूद हैं जो अनावश्यक तत्वों को बाहर निकालने का काम करते हैं। जब भोजन के साथ थोड़ी मात्रा में एल्युमिनियम शरीर में प्रवेश करता है तो स्वस्थ किडनी उसे आसानी से फिल्टर कर शरीर से बाहर निकाल देती है। इसलिए सामान्य रूप से स्वस्थ व्यक्ति के लिए एल्युमिनियम के बर्तनों का उपयोग किसी बड़े खतरे का कारण नहीं बनता। यह प्रक्रिया शरीर के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में सावधानी जरूरी मानी जाती है। जिन लोगों को गंभीर किडनी रोग है और जिनकी किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी है, उनके लिए एल्युमिनियम का अतिरिक्त सेवन समस्या पैदा कर सकता है। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार भोजन पकाने के बर्तनों का चयन करना चाहिए। इसके अलावा सामान्य लोगों के लिए भी यह सलाह दी जाती है कि बहुत ज्यादा खुरचे हुए बर्तनों का उपयोग न करें और अत्यधिक खट्टे व्यंजन लंबे समय तक एल्युमिनियम के बर्तनों में न रखें। इससे संभावित जोखिम और भी कम हो जाता है।
संतुलित उपयोग ही है बेहतर विकल्प
कुल मिलाकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह बताता है कि एल्युमिनियम के बर्तनों को लेकर फैला डर काफी हद तक अतिरंजित है। सामान्य परिस्थितियों में इनका उपयोग सुरक्षित माना जाता है, बशर्ते कि बर्तनों की स्थिति अच्छी हो और उनका उपयोग संतुलित तरीके से किया जाए। रसोई में स्वच्छता, उचित रखरखाव और संतुलित खानपान ही स्वास्थ्य की सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
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