आज सोशल मीडिया हमारे रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी अनदेखी की जाने वाली सबसे बड़ी समस्या है लगातार मिलने वाला नकारात्मक कंटेंट। दिनभर ऐसी खबरें, पोस्ट या वीडियो देखने से दिमाग की रासायनिक गतिविधियां बदलने लगती हैं। नकारात्मकता से हमारा मस्तिष्क खतरे की स्थिति महसूस करता है और तनाव प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने वाले लोगों में मानसिक थकान और भावनात्मक असंतुलन तेजी से बढ़ता है।
कोर्टिसोल बढ़ने से तनाव और एंग्जायटी का खतरा
नकारात्मक सामग्री देखने पर शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। जब कोर्टिसोल बार-बार बढ़े, तो व्यक्ति मामूली बातों पर भी बेचैनी, चिड़चिड़ापन और एंग्जायटी महसूस करने लगता है। सोशल मीडिया की निरंतर उत्तेजना मस्तिष्क को आराम नहीं लेने देती, जिससे तनाव स्थायी रूप ले सकता है। यह स्थिति लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
डूमस्क्रॉलिंग से नींद और ऊर्जा पर असर
सोशल मीडिया का एक खतरनाक पैटर्न है डूमस्क्रॉलिंग, जिसमें व्यक्ति देर रात तक लगातार नकारात्मक खबरें और अपडेट्स पढ़ता रहता है। यह आदत नींद के चक्र को अस्त-व्यस्त कर देती है और दिमाग को आराम नहीं मिल पाता। स्क्रीन लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को दबा देती है, जिससे नींद आने में देर लगती है या नींद टूट-टूट कर होती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति अगले दिन मानसिक रूप से थका हुआ, सुस्त और ध्यान केंद्रित करने में अक्षम महसूस करता है।
सामाजिक तुलना से बढ़ती हीन भावना और अवसाद
सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा दिखाते हैं। वहीं असल जिंदगी की मुश्किलें और चुनौतियां सामने नहीं आतीं। लगातार दूसरों की सजाई-संवारी पोस्ट देखकर व्यक्ति अनजाने में ही अपने जीवन से तुलना करने लगता है। यह तुलना हीन भावना, आत्म-संदेह और आत्मविश्वास में कमी का कारण बनती है। जब यह भावना गहराती है, तो डिप्रेशन और सामाजिक दूरियों की शुरुआत हो सकती है।
दिमाग की क्षमता पर पड़ता है दीर्घकालिक दबाव
लगातार नकारात्मकता देखने से दिमाग की सोचने, निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। मस्तिष्क की न्यूरल पाथवे बार-बार तनाव और भय को प्रोसेस करते-करते संवेदनशील हो जाती हैं। यह बदलाव व्यक्ति को छोटी समस्याओं में भी बड़ी आशंका देखने के लिए प्रेरित करता है, जिससे उसका संपूर्ण मानसिक स्वभाव बदल सकता है।
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