भोपाल।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) भोपाल की 1100 एकड़ जमीन मध्य प्रदेश सरकार को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। पिछले हफ्ते हुई त्रिपक्षीय बैठक में तय किया गया कि जमीन ट्रांसफर के लिए मध्य प्रदेश का राजस्व विभाग और केंद्र का भारी उद्योग मंत्रालय अपने-अपने स्तर पर कैबिनेट में प्रस्ताव रखेंगे। दोनों सरकारों की मंजूरी के बाद भेल बोर्ड जमीन हस्तांतरण पर अंतिम निर्णय लेगा।जमीन मिलने के बाद राज्य सरकार इसे सुनियोजित तरीके से विकसित करने की तैयारी में है। जमीन के मोनेटाइजेशन से होने वाली आय को भेल और मध्य प्रदेश सरकार के बीच 50-50% बांटने का प्रस्ताव है।
1100 एकड़ में होगा बड़ा डेवलपमेंट प्रोजेक्ट
प्रस्तावित 1100 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल दिल्ली के एरोसिटी, मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और गुजरात की गिफ्ट सिटी से अधिक है। योजना के अनुसार, जमीन को अलग-अलग चरणों में विकसित किया जाएगा।इस प्रोजेक्ट के जरिए भोपाल में बड़े स्तर पर शहरी विकास और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जमीन उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, इसके विकास का अंतिम स्वरूप और कार्यान्वयन कैबिनेट मंजूरी के बाद तय होगा।
भेल और सरकार मिलकर बनाएंगे एसपीवी
जमीन के विकास और मोनेटाइजेशन के लिए भेल और मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों को शामिल करके स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) बनाने की तैयारी है। जरूरत के अनुसार मोनेटाइजेशन वाली जमीन एसपीवी को हस्तांतरित की जा सकेगी।
प्रोजेक्ट के निर्माण और विकास के लिए केंद्र, राज्य सरकार और भेल की सहमति से एनबीसीसी या किसी अन्य एजेंसी का चयन किया जा सकता है। एसपीवी जमीन के विकास और परियोजना से जुड़े प्रमुख निर्णय लेने में भूमिका निभाएगी।
जमीन से अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए लैंड यूज और फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। इन बदलावों की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग की होगी।
प्रस्ताव के मुताबिक, मोनेटाइजेशन से मिलने वाली राशि में भेल और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 50-50% होगी। अंतिम व्यवस्था संबंधित मंजूरियों और समझौते के आधार पर तय की जाएगी।
764 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे की चुनौती
त्रिपक्षीय बैठक के बाद अधिकारियों ने भेल की प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण भी किया। बताया गया है कि 1100 एकड़ में से करीब 764 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे हैं। यह जमीन ट्रांसफर और विकास की प्रक्रिया में बड़ी चुनौती हो सकती है।
भेल के पास भोपाल में कुल 4479.21 एकड़ जमीन है। इसमें करीब 600 एकड़ जमीन फैक्ट्री और प्लांट के उपयोग में है, जबकि शेष हिस्से में टाउनशिप, अर्बन फॉरेस्ट और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, भेल के पास लगभग 1000 एकड़ अतिरिक्त खाली जमीन भी मौजूद है।
अब आगे क्या होगा?
राज्य के राजस्व विभाग और केंद्र के भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। दोनों स्तरों पर मंजूरी मिलने के बाद भेल बोर्ड जमीन ट्रांसफर पर अंतिम मुहर लगाएगा। इसके बाद एसपीवी के गठन, विकास एजेंसी के चयन और जमीन के मोनेटाइजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।