जबलपुर, 5 सितंबर 2026 | जबलपुर में उफनती नर्मदा के बीच शुक्रवार शाम बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बरगी बांध के गेट खुलने के बाद बढ़े जलस्तर के बीच ग्वारीघाट में पेट्रोलिंग कर रही होमगार्ड की मोटरबोट मझधार में डूब गई। नाव में करीब 15 होमगार्ड जवान सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नदी की बीच धार में मोटरबोट का इंजन बंद हो गया, जिसके बाद तेज बहाव में नाव असंतुलित होकर पानी भरने लगी और डूब गई। स्थानीय नाविकों ने दूसरी नावों से मौके पर पहुंचकर जवानों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया।
क्षमता 8 की, सवार थे करीब 15 जवान
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल मोटरबोट में सवार लोगों की संख्या को लेकर खड़ा हुआ है। होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह के हवाले से ताजा रिपोर्ट में मोटरबोट की अधिकतम क्षमता 8 लोगों की बताई गई है, जबकि दुर्घटना के वक्त इसमें करीब 15 जवान सवार थे। यानी नाव में क्षमता से लगभग दोगुने लोगों को बैठाया गया था। इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं और नाव चालक को निलंबित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मझधार में अचानक बंद हुआ इंजन
शुक्रवार को होमगार्ड और आपदा प्रबंधन की टीमें नर्मदा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए गश्त कर रही थीं। इसी दौरान बोट नदी के बीच पहुंची तो उसका इंजन अचानक बंद हो गया। तेज बहाव में नियंत्रण नहीं रहने से बोट गोते खाने लगी और उसमें पानी भर गया। कुछ ही देर में वह डूब गई। जवानों को पानी में देखकर घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।
Life Jacket ने बचाई जवानों की जान
हादसे में सबसे बड़ी राहत यह रही कि जवानों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। नाव डूबने के बाद वे पानी की सतह पर बने रहे और स्थानीय नाविकों को उन्हें निकालने का समय मिल गया। ताजा विश्वसनीय रिपोर्टों में सभी सवार लोगों के लाइफ जैकेट में होने की जानकारी है। इसलिए फिलहाल “चालक ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी” वाले दावे को पुष्ट तथ्य के रूप में प्रकाशित करना ठीक नहीं होगा।
स्थानीय नाविक बने मददगार
नाव डूबती देखकर घाट पर मौजूद स्थानीय नाविक तत्काल अपनी नावों के साथ नदी में उतरे। उन्होंने पानी में फंसे जवानों को एक-एक कर नाव में बैठाया और सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया। पुलिस और अन्य राहत टीमें भी मौके पर सक्रिय हुईं। किसी जवान के लापता होने या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।
क्यों हो रही थी नर्मदा में पेट्रोलिंग?
मंडला, डिंडोरी और बरगी बांध के कैचमेंट क्षेत्र में भारी बारिश के बाद बांध से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा गया था। इसके चलते जबलपुर में नर्मदा का जलस्तर और प्रवाह बढ़ गया। ग्वारीघाट समेत संवेदनशील घाटों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए होमगार्ड की टीमें नाव से पेट्रोलिंग कर रही थीं। इसी दौरान यह हादसा हुआ।
Boat की फिटनेस पर भी उठे सवाल
इंजन का मझधार में बंद होना और क्षमता से अधिक जवानों को बैठाना अब जांच का विषय है। यह पता लगाया जाएगा कि नाव को पेट्रोलिंग पर भेजने से पहले उसकी तकनीकी जांच हुई थी या नहीं और क्षमता से ज्यादा लोगों को उसमें क्यों बैठाया गया। मीडिया की शुरुआती रिपोर्ट में चालक की संभावित त्रुटि की बात कही गई थी, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच के बाद ही तय होगा। इसलिए फिलहाल हादसे के लिए किसी एक व्यक्ति को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
4 महीने पहले बरगी में हुआ था दर्दनाक Cruise हादसा
ग्वारीघाट की इस घटना ने इसी साल 30 अप्रैल को बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे की याद भी ताजा कर दी है। अचानक आए तूफान और तेज लहरों के बीच पर्यटन विभाग से जुड़ा क्रूज पलट गया था। अंतिम आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी और 28 लोगों को बचाया गया था। मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग गठित किया था। आयोग को हादसे के कारण, सुरक्षा व्यवस्था और रेस्क्यू ऑपरेशन की जांच के साथ प्रदेश में नाव एवं वॉटर टूरिज्म गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा SOP पर सुझाव देने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल
चार महीने के भीतर जबलपुर में पानी से जुड़े दूसरे बड़े हादसे ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फर्क यह रहा कि शुक्रवार के ग्वारीघाट हादसे में लाइफ जैकेट, स्थानीय नाविकों की तत्परता और तत्काल बचाव के कारण सभी जवान सुरक्षित रहे। अब जांच में मोटरबोट की फिटनेस, निर्धारित क्षमता और संचालन से जुड़े नियमों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।